मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध संकट: ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर
dailyhulchul
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता गहरा दी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने सख्त बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान के दुश्मनों को “युद्ध रोकना ही होगा”। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि “बहुत देर होने से पहले अपनी जिम्मेदारी निभाए।” बघाई ने चेतावनी दी कि जो प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, वह “जल्द ही यूरोप को भी अपनी चपेट में ले सकती है।”
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ताज़ा उपग्रह तस्वीरों के आधार पर पुष्टि की है कि ईरान के नतांज़ स्थित भूमिगत यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के प्रवेश भवनों को कुछ हालिया नुकसान पहुंचा है। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रकार का रेडियोलॉजिकल प्रभाव नहीं पाया गया है और न ही अतिरिक्त क्षति के संकेत मिले हैं।
दूसरी ओर, इज़राइल ने अपने सैनिकों को दक्षिणी लेबनान में आगे बढ़ने और रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा करने का निर्देश दिया है। इससे पहले उस क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा बढ़ाया गया था। इस स्थिति के बाद लेबनानी सेना ने सीमा क्षेत्र से पीछे हटने का निर्णय लिया है। इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच सोमवार से शुरू हुई झड़पों के चलते अब तक कम से कम 30,000 विस्थापित लोग लेबनान में शरणस्थलों में पनाह ले चुके हैं, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बताया है।
ईरान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दक्षिणी शहर मीनाब में एक स्कूल पर हुए अमेरिका-इज़राइल हमले में मारे गए 165 लोगों के लिए सामूहिक अंतिम संस्कार आयोजित किया गया। सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान में अमेरिकी-इज़राइली हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 787 हो गई है। ईरानी रेड क्रिसेंट ने बताया कि कम से कम 153 शहरों में 500 से अधिक स्थानों को निशाना बनाया गया है।
खाड़ी क्षेत्र में भी तनाव फैलता दिखाई दे रहा है। कतर ने कहा है कि ईरान के साथ फिलहाल कोई संवाद नहीं चल रहा है और हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं, बल्कि उसके पूरे क्षेत्र को निशाना बना रहे हैं। वहीं कुवैत ने कुवैत सिटी स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर किए गए “विश्वासघाती हमले” की पुष्टि की है।
लगातार बढ़ते हमले, बढ़ती नागरिक हताहतों की संख्या और क्षेत्रीय शक्तियों की सीधी भागीदारी इस संघर्ष को व्यापक युद्ध में बदलने का खतरा पैदा कर रही है। वैश्विक समुदाय पर अब दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को काबू में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
टिप्पणियाँ