वैश्विक संघर्ष

चीन–जापान विवाद: ताइवान पर बयान से बढ़ा तनाव 

dailyhulchul

15 November, 2025 5 मिनट पढ़ें

चीन न को लेकर दिए गए बयान के बाद उठाया गया है। टाकाइची ने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो यह जापान की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा और जापान सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है।

चीन ने इसे “उकसाने वाला” बयान बताया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में “नुकसान” हुआ है तथा जापान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है। इसलिए चीनी विदेश मंत्रालय ने लोगों से फिलहाल जापान न जाने की अपील की है।

इस विवाद के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को तलब किया। चीनी सोशल मीडिया पर भी टाकाइची को लेकर कड़े कमेंट सामने आए। चीन की सेना से जुड़े मीडिया ने चेतावनी दी कि अगर जापान ताइवान मामले में दखल देगा, तो उसे “भारी कीमत चुकानी पड़ेगी”।

जापान ने अपने बयान वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। जापान का कहना है कि ताइवान जलडमरूमध्य में शांति जापान ही नहीं, पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए ज़रूरी है।

यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब हाल ही में टाकाइची और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में दोनों देशों ने संबंध सुधारने की बात कही थी। ताइवान का मुद्दा चीन-जापान रिश्तों में हमेशा से सबसे संवेदनशील रहा है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।

आगे का रास्ता

यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

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