गौतम गंभीर और अजित अग्रकर से सवाल: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम चयन पर उठे सवाल।
dailyhulchul
पहले दो दिन मैच में दबदबा दिखाने के बाद टीम इंडिया तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीका से कोलकाता टेस्ट हार गई। 124 रनों के आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 93 रनों पर सिमट गई। कप्तान शुभमन गिल गर्दन में चोट लगने के कारण दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने नहीं उतरे। गिल पहली पारी में सिर्फ तीन गेंद खेलकर रिटायर हर्ट हुए थे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था।
पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ वेनकटेश प्रसाद ने चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट—खासतौर पर मुख्य कोच गौतम गंभीर—पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चयन में स्पष्टता की कमी और ज़रूरत से ज़्यादा रणनीतिक बदलाव टीम को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
While we have been excellent in white- ball cricket.
— Venkatesh Prasad (@venkateshprasad) November 16, 2025
We can’t call ourselves a top Test side with such planning.
Selections without clarity and over-tactical thinking are backfiring. Poor results over a year in tests barring a drawn series in England. . #IndvsSA
प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
“सफेद गेंद क्रिकेट में हम शानदार रहे हैं, लेकिन इस तरह की प्लानिंग के साथ हम खुद को शीर्ष टेस्ट टीम नहीं कह सकते। चयन में स्पष्टता की कमी और ओवर-टैक्टिकल सोच टीम को पीछे धकेल रही है। पिछले एक साल में टेस्ट क्रिकेट में लगातार खराब प्रदर्शन दिखा है, इंग्लैंड में ड्रॉ सीरीज़ को छोड़कर।”
दक्षिण अफ्रीका के स्पिनर साइमन हार्मर मैच के हीरो रहे। उन्होंने दोनों पारियों में चार-चार विकेट लेकर कुल 8 विकेट झटके। पहली पारी में 4/30 के बाद दूसरी पारी में उन्होंने ऋषभ पंत को कैच एंड बोल्ड कर भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया।
इसके अलावा लेफ्ट-आर्म स्पिनर केशव महाराज ने भी दो लगातार गेंदों पर विकेट लेकर भारतीय पारी को समेट दिया। दक्षिण अफ्रीका ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ में 1-0 की बढ़त बना ली है।
दूसरी तरफ कप्तान टेम्बा बावुमा ने मुश्किल हालात में 55* रन बनाकर टीम को दूसरी पारी में 153 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया था। उनकी यह पारी मैच का अहम मोड़ साबित हुई।
यह हार टीम इंडिया की टेस्ट तैयारी और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, और अब दबाव टीम मैनेजमेंट व चयनकर्ताओं पर बढ़ता दिख रहा है।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
सांख्यिकी और तथ्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।
आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।
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