Delhi Crime’ सीजन 3 रिव्यू: शेफाली शाह और हुमा कुरैशी ने रौशनी बिखेरी एक कमजोर सीजन में
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नेटफ्लिक्स की प्रशंसित पुलिस ड्रामा ‘Delhi Crime’ का तीसरा सीजन अपनी ग्रिटी और रियलिस्टिक स्टोरीटेलिंग के साथ जारी है, जिसमें युवा लड़कियों और महिलाओं की अंतरराज्यीय मानव तस्करी की भयावह समस्या को उजागर किया गया है। शेफाली शाह ने DIG वर्तिका चतुर्वेदी की भूमिका फिर से निभाई है, जो अब उत्तर-पूर्व में ‘पनिशमेंट’ पोस्टिंग पर हैं, फिर भी न्याय के लिए अपने मिशन में अडिग हैं।
डायरेक्टर: तनुज चोपड़ा, यह सीजन 6 एपिसोड्स में बंटा हुआ है, जिनकी लंबाई 45-51 मिनट है। इसमें हुमा कुरैशी, रसिका दुग्गल, राजेश तैलंग, सयानी गुप्ता और मीता वशिष्ट जैसे मजबूत कलाकार शामिल हैं।
कहानी शुरू होती है एक स्थानीय मामले से, जिसमें एक किशोरी मां अपने बच्चे को छोड़ देती है, लेकिन जल्द ही यह एक राष्ट्रीय जांच में बदल जाता है। DIG वर्तिका और उनकी टीम एक बड़े तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करती है, जो कमजोर लड़कियों को पूर्वी भारत से झूठे जॉब ऑफर्स के जाल में फंसाकर कंटेनरों में भेजता है और परंपरा और सेक्स वर्क के नाम पर उनका शोषण करता है।
सीजन की सबसे खास प्रस्तुति हुमा कुरैशी ने निभाई है, जो मीना चौधरी (बड़ी दीदी) के रूप में हैं। हुमा इस निर्दयी तस्कर की भूमिका में आकर्षक और खतरनाक रूप से नजर आती हैं—जो एक समय में आवेगी, प्रतिशोधी और चालाक हैं। शेफाली शाह के साथ उनका डायनामिक सीजन में गहराई जोड़ता है, और संयम बनाम तीव्रता के बीच एक आकर्षक टकराव पैदा करता है। जहां शेफाली अपनी गंभीरता से कहानी को बांधती हैं, वहीं हुमा कहानी में तनाव और अनिश्चितता जोड़ती हैं।
दोनों किरदार उस दुनिया की नैतिक जटिलता को दर्शाते हैं जिसमें वे रहते हैं—एक असमान समाज की उपज, जो पितृसत्तात्मक संरचनाओं को चुनौती देते हुए अपनी जगह बनाने की कोशिश करते हैं। सीरीज अपराध के पीछे की संवेदनशीलता और सामाजिक संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है।
हालांकि सीजन 3 की गति पिछली सीज़नों की तुलना में थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन शेफाली शाह और हुमा कुरैशी की जबरदस्त अदाकारी यह सुनिश्चित करती है कि सीरीज दर्शकों पर स्थायी प्रभाव छोड़ती रहे।
कास्ट: शेफाली शाह, हुमा कुरैशी, रसिका दुग्गल, राजेश तैलंग, सयानी गुप्ता, मीता वशिष्ट
डायरेक्टर: तनुज चोपड़ा | एपिसोड्स: 6 | रनटाइम: 45-51 मिनट
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
सांख्यिकी और तथ्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।
आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।
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