स्मृति मंधाना ने पिता की
dailyhulchul
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट स्टार स्मृति मंधाना ने अपने पिता श्रिणिवास मंधाना की अचानक स्वास्थ्य खराब होने के बाद अपनी शादी को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है।
शनिवार दोपहर, स्मृति के पिता को सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनकी हालत को एंजाइना पेक्टोरिस के रूप में पहचाना, जिसके लिए गहन निगरानी की आवश्यकता है। हालांकि उनकी स्थिति अब स्थिर है, डॉक्टर उन्हें निगरानी में रखे हुए हैं और यदि उनकी हालत में सुधार होता है, तो आगे के परीक्षण जैसे एंजियोग्राफी किए जा सकते हैं।
इस वजह से, स्मृति ने अपनी शादी के कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया है और उन्होंने अपने पिता की सेहत को प्राथमिकता दी है। परिवार के करीबी सूत्रों ने पुष्टि की कि यह शादी, जो रविवार को सांगली, महाराष्ट्र में होने वाली थी, अब पुनर्निर्धारित की जाएगी जब तक उनके पिता पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते।
स्मृति, जो मैदान पर अपनी शानदार प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं, ने अपने फैंस से समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और इस कठिन समय में परिवार की गोपनीयता बनाए रखने की अपील की। उनके प्रबंधक तूहीन मिश्रा ने कहा, “स्मृति चाहती हैं कि उनके पिता पूरी तरह से ठीक हो जाएं, फिर ही वह शादी के आगे की योजनाओं पर विचार करेंगी।”
परिवार का ध्यान अभी श्रीनिवास मंधाना की रिकवरी पर है, और जबकि शादी को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है कि इसे फिर से कब निर्धारित किया जाएगा।
स्मृति के फैंस और शुभचिंतकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें समर्थन देने के संदेश भेजे हैं, और कई लोग इस कठिन समय में परिवार के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
सांख्यिकी और तथ्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।
आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।
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