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सूडान की गृहयुद्ध: भुला दी गई तबाही बेकाबू होती जा रही है

dailyhulchul

26 November, 2025 5 मिनट पढ़ें
सूडान की गृहयुद्ध: भुला दी गई तबाही बेकाबू होती जा रही है

जब दुनिया कई वैश्विक संकटों से जूझ रही है, तब सूडान का क्रूर गृहयुद्ध लगातार लोगों की जान ले रहा है और लाखों लोगों को विस्थापित कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की तत्काल गुहार लगाई है। दो प्रतिद्वंद्वी जनरलों के बीच शुरू हुआ सत्ता संघर्ष अब 21वीं सदी के सबसे भयानक मानवीय संकटों में से एक बन चुका है। दारफ़ूर में हालिया हिंसा ने युद्ध को एक नए और घातक मोड़ पर ला दिया है। नरसंहार, अकाल और व्यापक अत्याचारों की ख़बरें सामने आ रही हैं, जिससे तत्काल युद्धविराम की ज़रूरत साफ़ दिखती है, लेकिन विदेशी ताकतों का दख़ल शांति के रास्ते को जटिल बनाए हुए है।

पृष्ठभूमि: क्रांति से लेकर दुश्मनी तक

सूडान की उथल-पुथल की जड़ें 2019 के जनआंदोलन में हैं, जिसने 30 साल तक सत्ता पर काबिज़ तानाशाह उमर अल-बशीर को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था। इसके बाद सैन्य-नागरिक संयुक्त अंतरिम सरकार बनी, जिसका नेतृत्व सूडानी सेना (SAF) के जनरल अब्देल फत्ताह अल-बुरहान और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सेज़ (RSF) के जनरल मोहम्मद हमदान दगालो (जिन्हें हेमेदती के नाम से जाना जाता है) मिलकर कर रहे थे। RSF दरअसल 2000 के दशक में दारफ़ूर में नरसंहार के लिए कुख्यात जनजावीद मिलिशिया से ही विकसित हुई थी।

अक्टूबर 2021 में अल-बुरहान ने तख्तापलट कर नागरिक नेताओं को हटा दिया और प्रधानमंत्री अब्दल्ला हमदोक को गिरफ़्तार कर लिया। बुरहान और हेमेदती का नाज़ुक गठबंधन अप्रैल 2023 में टूट गया और खार्तूम में पूरी तरह युद्ध छिड़ गया। शुरू में यह विवाद RSF को नियमित सेना में विलय करने को लेकर था, लेकिन अब यह पूरे देश में फैल चुका है। 2023 से अब तक सीधे युद्ध, बीमारी और भुखमरी से 1.5 लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

मौजूदा मोर्चे: दारफ़ूर में RSF की बढ़त

युद्ध में सूडानी सेना (SAF) और RSF आमने-सामने हैं। SAF अब पूर्वी बंदरगाह शहर पोर्ट सूडान से काम कर रही है, जबकि RSF ने पश्चिमी सूडान का बड़ा हिस्सा, खार्तूम के बाहरी इलाके और दारफ़ूर के प्रमुख शहर अपने क़ब्ज़े में ले रखे हैं। पिछले महीने RSF ने 18 महीने की घेराबंदी के बाद उत्तरी दारफ़ूर की राजधानी अल-फ़ाशिर पर क़ब्ज़ा कर लिया। यह दारफ़ूर में SAF का आख़िरी बड़ा गढ़ था। RSF लड़ाकों ने जो वीडियो डाले हैं, उनमें नागरिकों की हत्याएँ दिख रही हैं, जिनमें एक मातृत्व अस्पताल में भी गोलीबारी हुई। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी कि युद्ध “बेकाबू हो चुका है”।

अब मध्य सूडान के कोरडोफ़ान क्षेत्र में भयंकर लड़ाई चल रही है। RSF पूर्व की ओर बढ़कर अल-ओबैद शहर की तरफ़ जा रही है, जहाँ SAF का एक बड़ा हवाई अड्डा है। SAF ने कुछ इलाक़े जैसे काज़क़िल और उम दम हाज अहमद वापस छीने हैं, लेकिन विश्लेषक लंबी लड़ाई की आशंका जता रहे हैं। दोनों पक्ष ड्रोन हमले कर रहे हैं, जिससे गेदारेफ़ और कसाला प्रांतों में बिजली व्यवस्था ठप हो गई है।

2025 में मई में SAF ने कुछ समय के लिए खार्तूम वापस ले लिया था, लेकिन दारफ़ूर में RSF की बढ़त ने उस सफलता को लगभग बेकार कर दिया।

मानवीय संकट: अकाल, बलात्कार और बड़े पैमाने पर विस्थापन

संयुक्त राष्ट्र इसे दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट बता रहा है। 2023 से अब तक 1.2 करोड़ से ज़्यादा लोग बेघर हो चुके हैं; इनमें 88 लाख देश के अंदर विस्थापित हैं और 35 लाख पड़ोसी देशों में शरणार्थी बन गए हैं। सिर्फ़ दारफ़ूर में ही हज़ारों लोग अल-फ़ाशिर में फँसे हुए हैं और ग़ैर-अरब समुदायों (जैसे मसालित) के खिलाफ़ जातीय सफ़ाए की ख़बरें आ रही हैं।

देश में अकाल फैला हुआ है: 2.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं, 2.1 करोड़ को तुरंत मदद चाहिए और 3.75 लाख लोग भुखमरी की कगार पर हैं। लगभग 40 लाख बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें 7.7 लाख की जान तुरंत ख़तरे में है। सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने एक हफ़्ते में अल-फ़ाशिर से भागी लड़कियों के साथ 32 बलात्कार के मामले दर्ज किए हैं। युद्ध में यौन हिंसा को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

राहत एजेंसियाँ कह रही हैं कि सड़कें बंद हैं और लड़ाई की वजह से मदद पहुँचाना नामुमकिन हो रहा है।

विदेशी हाथ: भू-राजनीति आग में घी डाल रही है

सूडान का युद्ध अकेला नहीं चल रहा। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर RSF को ड्रोन, हथियार और पैसा देने का आरोप है (दुबई इसे “फ़ेक न्यूज़” बता रहा है)। सूडान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में UAE के ख़िलाफ़ नरसंहार में सहायता का मुक़दमा दायर किया है। मिस्र और सऊदी अरब SAF का समर्थन कर रहे हैं। अमेरिका ने कई बार युद्धविराम कराने की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्ष बातचीत को नज़रअंदाज़ करते रहे हैं।

19 नवंबर को राष्ट्रपति ट्रम्प ने सऊदी क्राउन प्रिंस के कहने पर फिर कोशिश शुरू करने का ऐलान किया। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने भी दारफ़ूर के युद्ध अपराधों की जाँच तेज़ कर दी है।

आगे का रास्ता?

कोरडोफ़ान में लड़ाई तेज़ है, अल-दब्बा कैंप जैसे इलाक़ों में थोड़ी-बहुत मदद पहुँच रही है, लेकिन विशेषज्ञ कह रहे हैं कि विदेशी दख़ल बंद होना चाहिए और नागरिक शासन बहाल होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मदद चाहिए, लेकिन फंडिंग की भारी कमी है।

हाल ही में अपने यूट्यूब वीडियो में भारतीय विश्लेषक ध्रुव राठी ने बताया कि कैसे औपनिवेशिक विरासत, सोने की खदानें (जो RSF को फंड देती हैं) और वैश्विक उदासीनता ने इस संकट को बढ़ने दिया। गुटेरेश ने दोहा सम्मेलन में चेतावनी दी: “लाखों नागरिक फँसे हुए हैं… तुरंत कार्रवाई ज़रूरी है।”

बिना स्थायी युद्धविराम के सूडान का पतन क्षेत्रीय अस्थिरता को जन्म दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रॉक्सी हितों के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देनी होगी, वरना और बड़ी तबाही तय है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।

आगे का रास्ता

यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

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