हॉन्ग कॉन्ग में ऊँची इमारत में भीषण आग: 55 लोगों की मौत, 279 अब भी लापता
dailyhulchul
ताइ पो, हॉन्ग कॉंग – 27 नवंबर 2025 – हॉन्ग कॉंग के इतिहास में पिछले छह दशकों की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक में बुधवार दोपहर ताइ पो इलाके की एक आवासीय हाई-राइज इमारत में लगी भीषण आग ने कम से कम 55 लोगों की जान ले ली है और 279 लोग अब भी लापता हैं।
दोपहर में शुरू हुई यह आग तेजी से फैलते हुए पूरे कॉम्प्लेक्स की कई इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग बच नहीं पाए और शुरुआती बचाव कार्य भी इसकी भयावहता के सामने कम पड़ गए। दमकलकर्मियों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद देर रात तक आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक नुकसान बहुत हो चुका था।
खाक हुए मलबे के बीच सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मलबा हटने के साथ-साथ मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। हॉन्ग कॉंग फायर सर्विसेज विभाग के प्रवक्ता ने कहा, “यह हमारे समुदाय के लिए दिल दहला देने वाला पल है।” उन्होंने पहले जवानों की बहादुरी को भी सलाम किया जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई जिंदगियां बचाईं।
चश्मदीदों ने बताया कि ऊँची-ऊँची इमारतों से काला धुआँ उठता देख लोग बालकनी से मदद की गुहार लगा रहे थे। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपर से चीखें सुनाई दे रही थीं। मैंने अपने बच्चों को गोद में उठाया और भागा, लेकिन बहुत से लोग बाहर नहीं निकल पाए।”
आग का सटीक कारण अभी पता नहीं चल सका है, लेकिन प्रारंभिक जाँच में 30 साल पुरानी इस इमारत के बिजली तंत्र में खराबी की ओर इशारा किया जा रहा है। यह हादसा हॉन्ग कॉंग जैसे ऊँची इमारतों वाले शहर में भवन सुरक्षा मानकों पर फिर से बहस छेड़ चुका है।
हॉन्ग कॉंग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली गुरुवार सुबह घटनास्थल पर पहुँचे और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “हम हर उस परिवार के साथ हैं जो इस कल्पना से परे दुख को झेल रहा है। हमारी प्राथमिकता लापता लोगों को ढूँढना और पीड़ितों की मदद करना है।”
राहत कार्य जोरों पर हैं। अस्थायी आश्रय स्थापित कर दिए गए हैं और काउंसलिंग सेवाएँ भी शुरू की गई हैं। दुनिया भर से सहायता के प्रस्ताव आ रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
सांख्यिकी और तथ्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।
आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।
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