राजनीति और शासन

ट्रम्प ने सूडान में युद्धविराम का प्रस्ताव दिया, लेकिन सेना ने साफ़ इनकार कर दिया

dailyhulchul

28 November, 2025 5 मिनट पढ़ें
ट्रम्प ने सूडान में युद्धविराम का प्रस्ताव दिया, लेकिन सेना ने साफ़ इनकार कर दिया

वॉशिंगटन डीसी, 28 नवंबर 2025 – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सूडान में अप्रैल 2023 से चल रहे भयंकर गृहयुद्ध को रोकने के लिए एक विस्तृत युद्धविराम प्रस्ताव दिया है। इस युद्ध में अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं। लेकिन सूडानी सेना ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया और रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सेज (आरएसएफ) के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

ट्रम्प का प्रस्ताव मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर आधारित है:

  • तत्काल तीन महीने का पूर्ण युद्धविराम
  • भोजन, दवाइयाँ और ज़रूरी सामग्री की तुरंत आपूर्ति, क्योंकि 2.5 करोड़ से ज़्यादा सूडानी भुखमरी के कगार पर हैं
  • नौ महीने के अंदर नागरिक अंतरिम सरकार का गठन और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में निष्पक्ष चुनाव
  • दोनों पक्षों को हथियार सप्लाई पर सख़्त प्रतिबंध

व्हाइट हाउस से ट्रम्प ने कहा, “सूडान ख़ून बह रहा है। हज़ारों मरे, परिवार बिखरे, पूरा देश तबाही के मुहाने पर है। अमेरिका चुप नहीं बैठ सकता। यह प्रस्ताव शांति का रास्ता है। अब वक़्त है कि बंदूकें ख़ामोश हों।”

सूडान में जनरल अब्देल फ़त्ताह अल-बुर्हान की अगुआई वाली सेना और मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेदती) की आरएसएफ के बीच 2023 में सत्ता संघर्ष शुरू हुआ था। यह लड़ाई अब नरसंहार, बलात्कार और नागरिकों पर हमलों में बदल चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अब तक 10 हज़ार से ज़्यादा मौतें, 70 लाख लोग देश के अंदर विस्थापित और लाखों लोगों के लिए अकाल का ख़तरा मंडरा रहा है।

सेना ने अमेरिकी प्रस्ताव को “असमय” बताते हुए ठुकरा दिया। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अहमद हसन सुलेमान ने कहा, “अमेरिकी चिंता के लिए धन्यवाद, लेकिन आरएसएफ को हम आतंकवादी मानते हैं। जब तक हर इंच ज़मीन मुक्त नहीं हो जाती और ये ख़तरा पूरी तरह ख़त्म नहीं होता, युद्धविराम की कोई बात नहीं हो सकती।”

आरएसएफ की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक़ अगर सेना दारफ़ूर जैसे उनके गढ़ों पर हमले रोके तो वे बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने प्रस्ताव की सराहना की, लेकिन कहा कि युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही के बिना शांति टिकाऊ नहीं होगी।

सर्दी नज़दीक आने के साथ विस्थापित शिविरों में हैज़ा फैल रहा है और बच्चों में कुपोषण की दर ख़तरनाक स्तर पर पहुँच गई है। ट्रम्प प्रशासन ने युद्धविराम की दिशा में प्रगति होने पर 50 करोड़ डॉलर की तुरंत मदद का वादा किया है।

सेना के इनकार से सूडान में गहरे अविश्वास की खाई एक बार फिर साफ़ दिख रही है। ट्रम्प का यह क़दम बातचीत को नई ज़मीन दे सकता है या फिर पिछले कई असफल प्रयासों की तरह ख़ामोश हो जाएगा, यह आने वाले दिन बताएँगे।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।

आगे का रास्ता

यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

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