ग्रीन कार्ड का सपना से हथकड़ी की हकीकत तक: अमेरिकी नागरिकों की पत्नियों पर मुसीबत
dailyhulchul
सैन डिएगो, 28 नवंबर 2025 – जो पल परिवार के मिलन और नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक होना चाहिए था, वह दर्जनों विदेशी मूल की पत्नियों के लिए दर्दनाक त्रासदी बन गया है। सैन डिएगो के इमिग्रेशन ऑफिस में ग्रीन कार्ड इंटरव्यू के लिए पहुंची महिलाएं अब हथकड़ी लगाकर हिरासत में ली जा रही हैं। 12 नवंबर से अब तक कई दर्जन महिलाओं को हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें नई-नवेली मां और अमेरिकी सैनिकों की पत्नियां भी शामिल हैं।
ब्रिटेन, जर्मनी और थाईलैंड जैसे देशों से आई इन महिलाओं पर वीजा उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है। एक दिल दहला देने वाले मामले में ब्रिटिश नागरिक केटी को उनके पति स्टीफन पॉल को रोते हुए अपनी पांच महीने की बच्ची को गोद से छीनकर ले जाना पड़ा। स्टीफन ने कहा, “मेरी रोती हुई पत्नी के हाथों से मुझे अपनी बच्ची छीननी पड़ी। हमारा परिवार इस तरह टूट जाए, यह पागलपन है।”
इसी तरह का दर्द 20 साल तक अमेरिकी मरीन में सेवा देने वाले सैमुअल शास्तीन भी झेल रहे हैं। उनकी थाईलैंड में जन्मी पत्नी को भी ग्रीन कार्ड इंटरव्यू के दौरान हिरासत में ले लिया गया। शास्तीन ने कहा, “हम देश की रक्षा के लिए सब कुछ करते हैं, फिर भी हमें धोखा दिया जाता है। जैसे हमने कभी कुछ किया ही न हो।”
ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति के तहत यह कार्रवाई हो रही है। व्हाइट हाउस के पास एक अफगानी नागरिक द्वारा गोलीबारी की घटना के बाद प्रशासन ने “तीसरे विश्व के देशों” से आने वाले लोगों की इमिग्रेशन रोकने और बड़े पैमाने पर निर्वासन की घोषणा की थी। ICE का बयान साफ है: “हम सभी अवैध रूप से मौजूद विदेशियों के खिलाफ कानून लागू करते हैं। अपराधी होना जरूरी नहीं। अमेरिका में अवैध रूप से रहना ही संघीय कानून का उल्लंघन है।”
ग्रीन कार्ड, जो अमेरिका में हमेशा के लिए रहने और काम करने का अधिकार देता है, इन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण था। लेकिन अब यही प्रक्रिया जाल बन गई है। लोग उम्मीद लेकर आते हैं और हथकड़ी लगाकर लौटते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह “जीरो टॉलरेंस” नीति कानून का पालन करने वाले परिवारों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। एक वकील ने कहा, “ये अपराधी नहीं, यहां जीवन बसाने वाले लोग हैं।”
हिरासत की यह कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रही। प्रभावित परिवार कानूनी लड़ाई और भावनात्मक-आर्थिक संकट के बीच फंसे हैं। स्टीफन पॉल और सैमुअल शास्तीन जैसे अमेरिकी नागरिकों के लिए अब अमेरिकी सपना धुंधला पड़ गया है। छुट्टियों का मौसम नजदीक है, सवाल यही है – कितने और परिवार बिखरेंगे, कब तक इंसानियत हथकड़ी में जकड़ी रहेगी?
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
सांख्यिकी और तथ्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।
आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।
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