उज्जैन रेलवे स्टेशन पर विकलांग व्यक्ति से दुर्व्यवहार, GRP कांस्टेबल सस्पेंड — वीडियो वायरल
dailyhulchul
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। नागदा रेलवे स्टेशन पर सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के एक हेड कांस्टेबल ने प्लेटफॉर्म पर सो रहे एक दिव्यांग व्यक्ति को बेरहमी से पीट दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया।
यह घटना मंगलवार सुबह प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर हुई, जहां दिव्यांग व्यक्ति अपने बैग के साथ सो रहा था। उसी दौरान GRP हेड कांस्टेबल मान सिंह, जो सिविल ड्रेस में था, उसके पास पहुंचा और उसे थप्पड़ व लातों से मारना शुरू कर दिया।
आज आयोजनों के देश में दिव्यांग दिवस मनाया जाएगा …. वाकई
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) December 3, 2025
नागदा रेलवे स्टेशन की तस्वीर है जहां पुलिस कॉन्स्टेबल बेरहमी से प्लेटफॉर्म पर सोए एक दिव्यांग को पीटता नज़र आ रहा है … कॉन्स्टेबल निलंबित हो चुका है pic.twitter.com/El4NqBYoBd
एक एसी कोच में यात्रा कर रहे यात्री ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में देखा जा सकता है कि कांस्टेबल बार-बार दिव्यांग व्यक्ति को थप्पड़ मारता और पेट व शरीर पर लातें मारता है, जबकि वह रोते हुए अपना सामान समेटने की कोशिश करता है।
वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद, GRP एसपी पद्मविलोचन शुक्ला ने आरोपी कांस्टेबल को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया। निलंबन कुछ ही घंटों के भीतर लागू कर दिया गया।
मान सिंह ने सफाई देते हुए दावा किया कि व्यक्ति नशे में था और गाली-गलौज कर रहा था, लेकिन इस बयान ने वीडियो में दिख रही क्रूरता को बिल्कुल भी सही नहीं ठहराया।
निलंबन आदेश में कहा गया है कि आरोपी अधिकारी का व्यवहार रेलवे पुलिस की छवि को धूमिल करता है और मध्यप्रदेश पुलिस विनियमों के नियम 64 का उल्लंघन है। निलंबन के दौरान उसे इंदौर रेलवे पुलिस लाइन में अटैच किया गया है और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।
सबसे दुखद पहलू यह रहा कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के दिन हुई — जिस दिन समाज में सम्मान, समानता और अधिकारों की बात की जाती है।
सोशल मीडिया और मानवाधिकारों से जुड़े लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और पुलिस विभाग में सख्त जवाबदेही और सुधार की मांग की है।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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