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Surendra Koli को बरी करने वाला फैसला — Supreme Court of India का अहम आदेश

dailyhulchul

12 November, 2025 5 मिनट पढ़ें
Surendra Koli को बरी करने वाला फैसला — Supreme Court of India का अहम आदेश

निठारी कांड: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 13वें केस में बरी किया

Supreme Court of India ने निठारी हत्याकांड से जुड़े 13वें आपराधिक मामले में आरोपी सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवाई, न्यायमूर्ति सूर्य कांत तथा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की तीन-सदस्यीय पीठ ने यह निर्णय दिया। 

मामला क्या है

  • कोली उस देवी में घरेलू कामगार थे जहाँ शुरुआती घटना सामने आई थी (घर D5, सेक्टर 31, नोएडा)। 
  • 2005-06 में इस घर के आसपास कई लाशें मिली थीं तथा पुलिस जांच और सीबीआई हस्तक्षेप हुआ था।
  • इस पूरे मामले में कुल 13 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें से पहले 12 में कोली बरी हो चुके थे और अब 13वें में भी बरी किए गए हैं।

कोर्ट ने क्या कहा

  • कोर्ट ने कहा कि “इतना अफसोस की लम्बी-चौड़ी जांच के बावजूद, वास्तविक अपराधी की पहचान ऐसे रूप में नहीं हो पाई जो कानूनी मानदंडों पर खरी उतरती हो।”
  • पीठ ने यह भी कहा कि यदि एक ही साक्ष्य-आधार पर अलग-अलग मुकदमों में अलग-अलग नतीजे निकलते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन-और-स्वतंत्रता का अधिकार) के अंतर्गत न्यायसंगत नहीं है।
  • इसलिए कोर्ट ने अपना पूर्व का फैसला (2011 में कोली की मृत्यु-दंड पुष्टि) रद्द कर थोक बरी करने का आदेश दिया।

क्या हुआ था

  • कोली पर 2006/07 में घरेलू सहायकों की भूमिका में रहते हुए हत्या-विभाजन-लाशें छिपाने के आरोप थे।
  • वर्ष 2011 में कोली को पहले मुकदमों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद के संबंधी 12 मामलों में उनकी साक्ष्य-प्रक्रिया की खामियों के कारण बरी हुई थी।
  • अब 11 नवम्बर 2025 को इस 13वें मुकदमे में बरी होने का आदेश आ गया है।

अहम बिंदु

  • फैसले में प्रमुख बात यह रही कि अपराध साबित करने वाला साक्ष्य (जैसे क्रिमिनल कोड की 164 धारा के तहत बयान, खोज-प्राप्ति के दस्तावेज) कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।
  • कोर्ट ने कहा कि अगर प्रक्रिया ही दोषपूर्ण हो, तो दोषी करार देना न्याय के लिहाज से खरा नहीं ठहरता।
  • बरी होने के बाद कोली को तुरंत मुक्त करने का निर्देश दिया गया है, यदि अन्य किसी मामले में उनकी हिरासत न हो। 

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