दोहा फोरम: कतर के पीएम का चेतावनी, गाजा संघर्ष विराम ‘संवेदनशील मोड़’ पर
dailyhulchul
क़तर की राजधानी दोहा में 23वां दोहा फोरम शुरू हो गया है, जिसमें दुनिया के शीर्ष नेता, वरिष्ठ राजनयिक और व्यवसायिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस साल का थीम है “Justice in Action: Beyond Promises to Progress”, और लगभग 150 देशों से 6,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।
इस फोरम में सीरिया और घाना के राष्ट्रपति, क़तर और लेबनान के प्रधानमंत्री, और तुर्की के विदेश मंत्री जैसे प्रमुख वक्ता शामिल हैं, जो वैश्विक मुद्दों पर अहम संवाद का मंच प्रदान करते हैं।
क़तर का बयान – गाज़ा स्थिति ‘Critical’
क़तर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा कि इज़राइल-गाज़ा युद्ध पर बातचीत अब एक ‘critical moment’ पर है। उन्होंने यह भी बताया कि हालिया ‘pause’ को अभी ceasefire नहीं माना जा सकता।
साइडलाइन मीटिंग्स में प्रमुख मुलाकातें
क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने दोहा फोरम के दौरान कई नेताओं से मुलाकात की, जिनमें शामिल हैं:
- सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शराआ
- सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद
- मॉरिटानिया के राष्ट्रपति मोहम्मद ग़ज़वानी
- घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा
- लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम
लेबनान के पीएम ने कहा कि क़तर जल्द ही नया आर्थिक सहायता पैकेज घोषित करेगा और उन्होंने इज़राइल पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ ने कहा कि उनके देश ने हाल ही में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन ईरान हमेशा मजबूती से खड़ा रहा है। उन्होंने कहा,
“हमने कई आक्रमण और कब्ज़ों का सामना किया, लेकिन हम कभी नहीं गिरे। हम अब भी मजबूती से खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।”
गाज़ा ceasefire पर चिंता
International Crisis Group के वाइस प्रेसिडेंट रिचर्ड ऐटवुड ने चेतावनी दी कि गाज़ा ceasefire का समझौता अटक सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत नहीं हुई, तो 20 लाख फिलिस्तीनी लोग आधे गाज़ा में फंसे रहेंगे, और पुनर्निर्माण सहायता नहीं पहुंचेगी।
ऐटवुड ने सुझाव दिया कि गाज़ा के प्रशासन के लिए फ़िलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स की कमेटी बनाई जाए, जिससे स्थानीय लोग निर्णय लेने में सक्षम हों।
दोहा फोरम में चल रही चर्चाओं पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं, जो गाज़ा के मानवीय संकट का समाधान और क्षेत्रीय सहयोग व कूटनीति को आगे बढ़ाने की दिशा तय करेंगी।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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