गोवा नाइटक्लब हादसा: अवैध संचालन के खिलाफ ज़मींदार की 20 साल की लड़ाई दर्दनाक अंत पर खत्म
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उत्तर गोवा के एक व्यस्त नाइटक्लब में लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत के बाद प्रदेश में गहरी हलचल मची है। इस त्रासदी ने न सिर्फ परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि अवैध निर्माण और कमजोर प्रशासन की परतें भी उधेड़कर रख दीं। 7 दिसंबर की रात Birch by Romeo Lane में लगी आग ने मिनटों में जश्न को मातम में बदल दिया। इसी घटना के बाद जमीन के मूल मालिक प्रदीप घाड़ी अमोनकर ने 20 साल पुरानी कानूनी लड़ाई को फिर से तेज करते हुए दावा किया है कि अवैध निर्माण और अवैध संचालन ने ही यह मौत का जाल बिछाया।
कैसे हुआ हादसा
शनिवार रात देर तक चल रहे कार्यक्रम के दौरान आग अचानक तेज लपटों और धुएं के साथ फैल गई। बहुमंजिला इमारत में मौजूद अधिकांश पीड़ित स्टाफ सदस्य थे, जो आग में फंसकर बाहर नहीं निकल सके। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि स्थल पर ज्वलनशील सामग्री और खराब सुरक्षा उपायों ने आग को और भयंकर बना दिया। शवों की पहचान का काम अभी भी जारी है।
20 साल की कानूनी जंग
अमोनकर, जिन्होंने 1994 में लगभग 37,000 वर्गमीटर भूमि खरीदी थी, ने बताया कि 2004 में सुरिंदर कुमार खोसला नामक व्यवसायी के साथ समझौता किया गया था, लेकिन भुगतान न होने के कारण सौदा टूट गया। इसके बावजूद खोसला ने निर्माण जारी रखा और अवैध दुकानों, रेस्तरां, छह इमारतों और संरचनाओं का विस्तार कर दिया, जिससे संरक्षित साल्टपैन क्षेत्र का अतिक्रमण हुआ।
दिसंबर 2023 में अमोनकर की शिकायत पर पंचायत ने कार्रवाई शुरू की, जनवरी 2024 में निरीक्षण हुआ, और फरवरी में शो-कॉज नोटिस जारी किया गया। लेकिन खोसला ने डायरेक्टरेट ऑफ पंचायत से स्टे ऑर्डर लेकर ध्वस्तीकरण रोक दिया। अमोनकर ने चेतावनी दी, “मुख्य आरोपी खोसला है… वह देश छोड़कर भाग सकता है।”
लाइसेंस समाप्त, फिर भी चलता रहा नाइटक्लब
खोसला के पीछे हटने के बाद लूथरा बंधुओं — सौरभ और गौरव — ने क्लब का संचालन संभाला, लेकिन मार्च 2024 में व्यापार लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद क्लब धड़ल्ले से चलता रहा। बिजली, पानी और रिपेयर के NOC तक पंचायत ने ही जारी किए। अर्पोरा सरपंच रोशन रेडकर ने माना कि स्टे ऑर्डर के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। पुलिस और फोरेंसिक टीमें रविवार से जांच में जुटी हैं। इसी बीच खबरें आ रही हैं कि लूथरा बंधु हादसे के बाद फुकेत भाग गए हैं।
एक वरिष्ठ फायर अधिकारी के अनुसार, “यह पूरी तरह से टाला जा सकने वाला हादसा था। न स्प्रिंकलर थे, न कई आपात निकास — यह मौत का जाल था।”
गोवा की नाइटलाइफ़ पर बड़ा सवाल
यह दुर्घटना उस अंधेरे पक्ष को उजागर करती है जहां पर्यटन के नाम पर अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा मिला। अमोनकर, जिन्हें वर्षों तक नज़रअंदाज़ किया गया, आज त्रासदी के बाद सही साबित हुए।
उन्होंने कहा, “20 वर्षों से मैं चेतावनी दे रहा था। 25 मौतों के बाद शायद कोई सुने।”
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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