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ऑस्ट्रेलियाई महिला की हत्या के दोषी भारतीय मूल के नर्स को उम्रकैद की सजा, पीड़िता के पिता चीखे – “नरक में सड़ो हरामी”

dailyhulchul

9 December, 2025 5 मिनट पढ़ें

क्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया): सात साल बाद आखिरकार न्याय मिला। भारतीय मूल के पूर्व नर्स राजविंदर सिंह (40) को 2018 में 24 साल की टोया कॉर्डिंगली की बर्बर हत्या के लिए दोषी ठहराया गया है। केर्न्स सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया और मंगलवार को उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई – बिना पैरोल (जमानत) की कोई संभावना नहीं।

22 अक्टूबर 2018 को वांगेटी बीच पर टोया अपने कुत्ते के साथ सुबह की सैर पर निकली थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजविंदर सिंह उस दिन पत्नी से झगड़ा करके बीच पर घूमने आया था। जब टोया का कुत्ता उसकी तरफ भौंका तो वह आग-बबूला हो गया। उसने फलों की थैली में छिपाकर लाया चाकू निकाला और टोया पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। हत्या के बाद उसने लाश को रेत में आधा दबाया और डर के मारे कुत्ते को पास के पेड़ से बाँध दिया।

हत्या के सिर्फ दो दिन बाद सिंह नौकरी, पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़कर “दादाजी बीमार हैं” कहकर भारत भाग गया। क्वींसलैंड पुलिस ने तीन हफ्ते में ही उसे मुख्य संदिग्ध मान लिया था। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन से उसकी गाड़ी टोया के आखिरी ठिकाने पर मिली। उसे पकड़वाने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने अब तक का सबसे बड़ा इनाम – 10 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर – घोषित किया।

चार साल फरार रहने के बाद नवंबर 2022 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे दिल्ली के एक गुरुद्वारे से गिरफ्तार किया। 2023 में प्रत्यर्पण के बाद मुकदमा चला। बीच में एक जूरी सदस्य को पक्षपात के आरोप में हटाया गया, लेकिन बाकी जूरी ने सर्वसम्मति से सिंह को दोषी ठहराया।

फैसला सुनते ही टोया के पिता ट्रॉय कोर्ट में खड़े होकर चीखे – “Rot in hell, you bastard!” (नरक में सड़ो, हरामी!)। सिंह ने कोई भाव नहीं दिखाया।

न्यायाधीश ने सजा सुनाते हुए कहा कि यह हत्या “बेहद क्रूर और बेमतलब” थी। राजविंदर सिंह अब जिंदगी भर ऑस्ट्रेलियाई जेल में सड़ेंगे। टोया की माँ वेनसा ने कहा, “आज हमारी बेटी को न्याय मिला।”

मुख्य बिंदु

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  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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