भारत से चावल आयात पर ट्रंप की चेतावनी: ‘डंपिंग’ का आरोप, नए टैरिफ का संकेत
dailyhulchul
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से चावल आयात पर नए टैरिफ लगाने की धमकी देते हुए आरोप लगाया है कि भारत अमेरिकी बाजार में कम कीमत पर चावल बेचकर “डंपिंग” कर रहा है। यह बयान ट्रंप ने 8 दिसंबर 2025 को व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों के लिए घोषित 12 अरब डॉलर (लगभग ₹1 लाख करोड़) के सहायता पैकेज कार्यक्रम के दौरान दिया।
ट्रंप के बयान की मुख्य बातें
कार्यक्रम के दौरान एक किसान प्रतिनिधि ने विदेशी चावल के कारण अमेरिकी किसानों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा उठाया, जिसके जवाब में ट्रंप ने भारत और थाईलैंड का नाम लेते हुए कहा कि ये देश “गैरकानूनी रूप से” चावल अमेरिका भेज रहे हैं।
ट्रंप ने सवाल किया—
“भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें टैरिफ देना चाहिए। क्या उनके पास चावल पर कोई छूट है?”
उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को “टैरिफ लगाकर बहुत जल्दी सुलझा” सकते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत से आयातित चावल पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी कर सकता है।
भारत-अमेरिका चावल व्यापार की स्थिति
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, लेकिन उसके लिए अमेरिकी बाजार का हिस्सा बहुत कम है।
- 2023-24 में भारत ने अमेरिका को 391.74 मिलियन डॉलर मूल्य का चावल निर्यात किया, जो उसकी कुल चावल निर्यात का मात्र 3.1% है।
- दूसरी ओर, अमेरिका के कुल चावल आयात में भारतीय चावल की हिस्सेदारी 26% है, जो उपभोक्ताओं की मजबूत मांग को दर्शाता है।
- अमेरिका पहले से ही भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाता है।
इस बीच, व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा के लिए 10-12 दिसंबर 2025 के बीच अमेरिकी वार्ता दल भारत का दौरा करने वाला है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक और पूर्व डीजीएफटी अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने ट्रंप के बयान को राजनीतिक और चुनावी रणनीति बताया। उन्होंने कहा:
“यह कदम व्यापार नीति से ज्यादा घरेलू राजनीति से प्रेरित लगता है। यदि टैरिफ लगाया गया, तो उसका प्रभाव अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ज्यादा पड़ेगा—क्योंकि चावल की कीमतें बढ़ जाएंगी, जबकि भारतीय निर्यात पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।”
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है, हालांकि अमेरिकी बाजार पर कम निर्भरता के कारण भारतीय निर्यातक बड़े नुकसान से बच सकते हैं।
ट्रंप का यह बयान उनकी पहले की संरक्षणवादी व्यापार नीति (प्रोटेक्शनिज़्म) को दोहराता है। लेकिन व्यापार आंकड़े बताते हैं कि इस तरह के टैरिफ का वास्तविक असर अमेरिकी उपभोक्ताओं और किसानों पर अधिक और भारतीय निर्यातकों पर कम पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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