थाईलैंड-कंबोडिया सीमा युद्ध: ट्रंप की मध्यस्थता से उम्मीद, लेकिन हिंसा जारी
dailyhulchul
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर चल रहा संघर्ष पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच तोपखाने, लड़ाकू जेट और ड्रोनों का इस्तेमाल जारी है, जिससे अब तक 20 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और करीब 200 घायल हुए हैं। दोनों तरफ से लगभग 6 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो शरणार्थी शिविरों में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
यह संघर्ष जुलाई 2025 की पांच दिवसीय लड़ाई के बाद का सबसे गंभीर है। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था, जिसे अक्टूबर में औपचारिक रूप दिया गया। लेकिन नवंबर में लैंडमाइन घटना के बाद थाईलैंड ने समझौते को निलंबित कर दिया, और 8 दिसंबर से फिर गोलीबारी शुरू हो गई।
विवाद की जड़: प्राचीन मंदिर और औपनिवेशिक नक्शे
विवाद की मुख्य वजह 11वीं सदी का प्रीह विहार मंदिर है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसे कंबोडिया को सौंपा, लेकिन आसपास की जमीन पर थाईलैंड दावा करता है। फ्रांसीसी औपनिवेशिक काल के नक्शों से शुरू हुआ यह तनाव राष्ट्रवादी भावनाओं से लगातार भड़कता रहा है।
नवीनतम स्थिति और आरोप-प्रत्यारोप
थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने पुष्टि की है कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की। ट्रंप ने दावा किया है कि वे जल्द ही लड़ाई रोक देंगे। कंबोडिया ने थाई आरोपों को खारिज किया कि वे चीनी मिसाइलें तैनात कर रहे हैं या विदेशी ड्रोन ऑपरेटर इस्तेमाल कर रहे हैं। थाई सेना ने F-16 जेट से हमले किए, जबकि कंबोडिया ने तोपखाने से जवाब दिया।
हताहतों का आंकड़ा
| पक्ष | मारे गए | घायल |
|---|---|---|
| थाईलैंड | 9 सैनिक | 120+ |
| कंबोडिया | 11 (नागरिक व सैनिक) | दर्जनों |
| कुल | 20+ | ~200 |
आगे की राह
ट्रंप की मध्यस्थता से उम्मीद है, लेकिन दोनों देशों में राष्ट्रवादी दबाव और आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति नाजुक बनी हुई है। ASEAN क्षेत्र की स्थिरता को खतरा है। संयुक्त राष्ट्र ने संयम बरतने की अपील की है।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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