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हार्ट अटैक से तड़पते पति को बचाने की गुहार लगाती रही पत्नी, किसी ने नहीं की मदद

dailyhulchul

17 December, 2025 5 मिनट पढ़ें

घटना का विवरण

बेंगलुरु, 17 दिसंबर 2025: दक्षिण बेंगलुरु के बनशंकरी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। 34 वर्षीय गैरेज मैकेनिक वेंकटरमणन को दिल का दौरा पड़ा, लेकिन समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने और राहगीरों की उदासीनता के कारण उनकी जान चली गई। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी पत्नी रूपा खून से लथपथ हाथ जोड़कर मदद मांगती दिख रही हैं, लेकिन कोई रुकता नहीं।

रात का भयानक संघर्ष

घटना 16-17 दिसंबर की रात करीब 3:30 बजे की है। घर पर अचानक वेंकटरमणन को तेज सीने में दर्द हुआ। पत्नी रूपा ने उन्हें स्कूटर पर बिठाकर पास के एक निजी अस्पताल ले जाने का फैसला किया। पहले अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध न होने से उन्हें वापस लौटना पड़ा। दूसरे अस्पताल (री-लाइफ) में ईसीजी से पता चला कि माइल्ड हार्ट अटैक हुआ है, लेकिन यहां भी इमरजेंसी ट्रीटमेंट या एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हुई। डॉक्टरों ने श्री जयदेवा इंस्टीट्यूट ले जाने की सलाह दी।

सड़क पर मौत का इंतजार

फिर से स्कूटर पर सवार होकर जयदेवा अस्पताल की ओर जाते समय कादेरनाहल्ली के पास वेंकटरमणन की हालत बिगड़ गई। दर्द से कराहते हुए स्कूटर अनियंत्रित हो गया और दोनों सड़क पर गिर पड़े। वेंकटरमणन खून से लथपथ तड़पने लगे। रूपा ने गुजरते वाहनों से मदद मांगी—हाथ जोड़कर, चीखकर—लेकिन 10-15 मिनट तक कोई नहीं रुका। आखिरकार एक कैब ड्राइवर ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पत्नी का दर्दभरा बयान

रूपा ने मीडिया से कहा, “मैं खून से लथपथ थी, मदद के लिए गुहार लगा रही थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मानवता ने मेरे पति की मदद नहीं की।” फिर भी इस दुख की घड़ी में परिवार ने नेक काम किया—वेंकटरमणन की आंखें दान कर दो अंधों को नई रोशनी दी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

वेंकटरमणन के पीछे पत्नी रूपा, 5 साल का बेटा, 18 महीने की बेटी और बुजुर्ग मां रह गई हैं। उनकी मां पहले ही पांच बच्चों को खो चुकी थीं; वेंकटरमणन उनका इकलौता जीवित बेटा था। मौत की खबर सुनकर मां को भी हार्ट अटैक आया और वे गंभीर रूप से बीमार हैं।

समाज पर उठते सवाल

यह घटना आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों के साथ-साथ समाज में बढ़ती उदासीनता पर गंभीर सवाल उठाती है। सोशल मीडिया पर लोग गुस्सा और दुख जता रहे हैं। कई लोग गुड समरिटन कानून की याद दिला रहे हैं, जो मदद करने वालों को कानूनी सुरक्षा देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रात में अस्पतालों की इमरजेंसी सुविधाएं मजबूत करने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि जीवन अनमोल है और एक छोटी सी मदद किसी की जान बचा सकती है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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