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इज़राइल ने लेबनान पर हमले तेज़ किए, यरूशलेम में 40 से अधिक लोग बेघर

dailyhulchul

22 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
इज़राइल ने लेबनान पर हमले तेज़ किए, यरूशलेम में 40 से अधिक लोग बेघर

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेज़ होता दिखाई दे रहा है। इज़राइल ने लेबनान पर अपने सैन्य हमलों में इज़ाफा कर दिया है, जबकि यरूशलेम में की गई कार्रवाई के चलते दर्जनों फिलिस्तीनी परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। ताज़ा घटनाओं से क्षेत्र में मानवीय संकट और गहराता नजर आ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली सेना ने लेबनान के दक्षिणी और तटीय इलाकों में कम से कम 10 से 12 हवाई हमले किए। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुँचा है और 15 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। बमबारी के बाद कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि सैकड़ों लोग अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए हैं।

वहीं, कब्जे वाले पूर्वी यरूशलेम में इज़राइली प्रशासन ने एक आवासीय इमारत को गिरा दिया। इस कार्रवाई के कारण करीब 40 से 45 लोग बेघर हो गए, जिनमें 20 से अधिक बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें बहुत कम समय में घर खाली करने का आदेश दिया गया, जिससे वे अपनी ज़रूरी वस्तुएं तक नहीं निकाल सके।

मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक यरूशलेम में 350 से ज्यादा फिलिस्तीनी लोग घरों के ध्वस्तीकरण की वजह से बेघर हो चुके हैं। संगठनों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इज़राइल-लेबनान सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां किसी बड़े टकराव की आशंका को बढ़ा रही हैं। बीते तीन महीनों में दोनों पक्षों के बीच 100 से अधिक बार सीमा पर तनावपूर्ण घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे युद्धविराम की स्थिति कमजोर होती जा रही है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नज़र बनाए हुए है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। हालांकि ज़मीनी हालात यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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