गाज़ा में स्वास्थ्य संकट गहराया, मरीजों की जान पर खतरा
dailyhulchul
गाज़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति रुकने के कारण हजारों मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। अस्पतालों में हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं और इलाज की क्षमता तेजी से घट रही है।
अस्पतालों में सर्जरी के लिए जरूरी सामग्री, दर्द निवारक दवाइयाँ, एनेस्थीसिया, डायलिसिस किट और ऑक्सीजन की भारी कमी बताई जा रही है। कई जगह ऑपरेशन टालने पड़ रहे हैं और गंभीर मरीजों को केवल प्राथमिक इलाज तक सीमित रखा जा रहा है।
बिजली संकट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सीमित ईंधन के कारण जनरेटर ठीक से नहीं चल पा रहे, जिससे आईसीयू, नवजात वार्ड और जीवन-रक्षक मशीनें प्रभावित हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो कई मरीजों को बचा पाना संभव नहीं होगा।
इस संकट का असर केवल युद्ध में घायल लोगों तक सीमित नहीं है। किडनी के मरीज, कैंसर से पीड़ित लोग, गर्भवती महिलाएँ और नवजात शिशु भी सबसे अधिक जोखिम में हैं। नियमित इलाज और दवाइयों के अभाव में कई बीमारियों की स्थिति गंभीर होती जा रही है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बच्चों में कुपोषण और संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सा कर्मियों की कमी और संसाधनों के अभाव के चलते अस्पतालों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
गाज़ा में मौजूदा हालात एक गंभीर मानवीय संकट की ओर इशारा कर रहे हैं, जहाँ समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने से मरीजों की मौत का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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