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दिल्ली हाई कोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत: उन्नाव बलात्कार मामले में पीड़िता परिवार ने किया कड़ा विरोध

dailyhulchul

24 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
दिल्ली हाई कोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत: उन्नाव बलात्कार मामले में पीड़िता परिवार ने किया कड़ा विरोध

दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अपील लंबित रहने तक सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने उनकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया है, लेकिन कई सख्त शर्तों के साथ यह राहत दी गई है।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने 23 दिसंबर को दिए गए आदेश में कुलदीप सिंह सेंगर को 15 लाख रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और तीन समान राशि की जमानतों पर रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेंगर पीड़िता के घर से 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं आ सकते। उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा, हर सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी होगी और केवल दिल्ली में ही रहना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि पीड़िता या उनके परिवार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धमकी देने पर जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।

हालांकि, यह राहत अभी व्यावहारिक रूप से सेंगर को जेल से बाहर नहीं निकाल पाएगी। वे पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ के अलग मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं, जिसमें अभी तक जमानत नहीं मिली है। ऐसे में वे जेल में ही रहेंगे।

मामले की पूरी कहानी

यह मामला अप्रैल 2017 से शुरू हुआ था, जब उन्नाव जिले के माखी गांव की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। पीड़िता ने बताया था कि वह नौकरी की मदद मांगने गई थी, लेकिन वहां से जबरदस्ती ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया गया।

शिकायत दर्ज कराने की कोशिश पर पुलिस ने शुरू में केस दर्ज करने से इनकार कर दिया। करीब 10 महीने बाद ही FIR दर्ज हुई। इस दौरान पीड़िता ने न्याय न मिलने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया।

इसके बाद पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किया गया और हिरासत में उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्सिस (खून में जहर) बताया गया, जो आंत में छेद और कई चोटों से हुआ था।

फिर जुलाई 2019 में, जब पीड़िता कोर्ट में गवाही देने रायबरेली जा रही थीं, तो उनकी कार से एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस संदिग्ध दुर्घटना में उनकी चाची और मौसी की मौके पर ही मौत हो गई। पीड़िता को 90% से ज्यादा जलन हुई और वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। आरोप लगे कि यह हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी। पीड़िता को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां लंबे इलाज के बाद वे बच गईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और ट्रायल उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया। दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

पीड़िता परिवार का गुस्सा

जमानत मिलने के कुछ घंटों बाद ही पीड़िता, उनकी मां और महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पीड़िता की बहन ने कहा, “यह फैसला हमारे परिवार के लिए मौत का फरमान है। हमें खतरा है।” पीड़िता ने खुद इस फैसले को “अपने परिवार के लिए काल” करार दिया और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।

यह मामला पिछले 8 सालों से न्याय की लड़ाई का प्रतीक बना हुआ है। अब दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई और अन्य मामलों के फैसले इसकी आगे की दिशा तय करेंगे।

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