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गाज़ा में क्रिसमस की रात मातम में बदली, बमों और ड्रोन की आवाज़ों ने दबाई खुशियाँ

dailyhulchul

25 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
गाज़ा में क्रिसमस की रात मातम में बदली, बमों और ड्रोन की आवाज़ों ने दबाई खुशियाँ

गाज़ा पट्टी में इस साल क्रिसमस का त्योहार शांति और खुशियों की जगह डर, मातम और तबाही के बीच गुज़रा। जहां दुनिया के कई हिस्सों में लोग क्रिसमस की रौनक में डूबे रहे, वहीं गाज़ा में लगातार हो रहे हवाई हमलों, बमबारी और आसमान में मंडराते ड्रोन की आवाज़ों ने त्योहार की हर खुशी को दबा दिया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्रिसमस की रात भी गाज़ा में विस्फोटों की गूंज सुनाई देती रही। कई इलाकों में अचानक हुए हमलों के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके। चर्चों और रिहायशी इलाकों के आसपास सुरक्षा का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। कई परिवारों ने त्योहार की प्रार्थनाएं भी डर और अनिश्चितता के बीच कीं।

गाज़ा के ईसाई समुदाय, जो पहले से ही सीमित संख्या में है, इस हालात से सबसे ज्यादा प्रभावित दिखा। लोगों का कहना है कि क्रिसमस का असली मतलब शांति और उम्मीद होता है, लेकिन यहां हर गुजरता दिन सिर्फ जान बचाने की जद्दोजहद बन गया है। बच्चों के लिए न तो सजावट थी और न ही उत्सव, बल्कि विस्फोटों की आवाज़ और डर उनका सच बन गया।

स्वास्थ्य और राहत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हालिया हमलों में कई नागरिक घायल हुए हैं और पहले से तबाह बुनियादी ढांचे पर और दबाव बढ़ा है। बिजली, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के चलते हालात और गंभीर हो गए हैं। अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ रही है, जबकि संसाधन सीमित होते जा रहे हैं।

गाज़ा के लोगों का कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सिर्फ एक ही अपील कर रहे हैं—स्थायी संघर्षविराम और शांति। उनका कहना है कि त्योहार किसी भी धर्म का हो, इंसानों को बिना डर के जीने का हक मिलना चाहिए।

इस साल गाज़ा में क्रिसमस उम्मीदों का नहीं, बल्कि युद्ध की भयावह सच्चाई का प्रतीक बनकर रह गया, जहां जश्न की जगह सन्नाटा और आंसुओं ने ले ली।

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