यमन ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ रक्षा समझौता रद्द किया, यूएई बलों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश
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यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (पीएलसी) के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ संयुक्त रक्षा समझौते को रद्द कर दिया है। साथ ही, उन्होंने सभी यूएई बलों को यमन से 24 घंटे के अंदर बाहर निकलने का आदेश दिया है। यह फैसला दक्षिणी अलगाववादी गुट साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) की हालिया सैन्य कार्रवाइयों और यूएई के कथित समर्थन के बीच बढ़ते तनाव के कारण लिया गया है।
अल-अलीमी ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि यूएई का एसटीसी को सैन्य और वित्तीय सहायता प्रदान करना यमन की संप्रभुता और एकता के लिए खतरा है। उन्होंने सभी बंदरगाहों और सीमाओं पर 72 घंटे का हवाई, स्थलीय और समुद्री नाकाबंदी लगाने की भी घोषणा की, साथ ही 90 दिनों की आपातकालीन स्थिति घोषित की।
इस घटना की पृष्ठभूमि में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मुकल्ला बंदरगाह पर यूएई से आने वाले हथियारों और बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाकर सीमित सैन्य कार्रवाई की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने यूएई के एसटीसी को दिए समर्थन को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘लाल रेखा’ करार दिया और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। सऊदी अरब ने यूएई से सभी सैन्य सहायता बंद करने और बलों की वापसी की मांग की।
एसटीसी, जो यूएई का समर्थन प्राप्त है, ने दिसंबर में हदरमौत, अल-महरा और अब्यान प्रांतों में बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है। इन क्षेत्रों में तेल और गैस के महत्वपूर्ण संसाधन हैं। एसटीसी दक्षिण यमन को अलग राज्य बनाने की मांग करता है, जबकि पीएलसी और सऊदी अरब यमन की एकता का समर्थन करते हैं।
यमन में 2015 से चला आ रहा गृहयुद्ध अब नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हूती विद्रोहियों के खिलाफ गठबंधन में ही सऊदी अरब और यूएई के बीच गहरी दरार उजागर हो गई है। चीन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और राजनीतिक संवाद से विवाद सुलझाने की अपील की है।
यह विकास यमन की शांति प्रक्रिया और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि गठबंधन की एकता टूटने से हूती गुट को फायदा हो सकता है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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