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मां का खौफनाक सच: 5 साल के बेटे की हत्या पर उम्रकैद

dailyhulchul

19 January, 2026 5 मिनट पढ़ें
मां का खौफनाक सच: 5 साल के बेटे की हत्या पर उम्रकैद

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आया यह मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। जिस मां को बच्चे की पहली दुनिया माना जाता है, उसी मां ने अपने ही पांच वर्षीय बेटे की हत्या कर दी। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि जब रिश्तों में डर, झूठ और स्वार्थ हावी हो जाते हैं, तो उनके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं।

यह घटना ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र की है। वर्ष 2023 में पांच साल का मासूम जतिन अचानक अपनी मां ज्योति राठौर को एक अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख बैठा। बच्चे को देखकर मां घबरा गई। उसे डर था कि बेटा यह बात अपने पिता को बता देगा और उसका सच सामने आ जाएगा। इसी घबराहट और भय में उसने ऐसा कदम उठाया, जिसे कोई भी मां कभी सोच भी नहीं सकती। आरोप है कि ज्योति ने अपने बेटे को छत से नीचे फेंक दिया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद शुरुआत में इसे एक सामान्य हादसा माना गया। परिवार और आसपास के लोगों को यही बताया गया कि बच्चा खेलते समय छत से गिर गया था। मामला तब पलटा जब कुछ दिन बाद मां ने अपने पति के सामने सच कबूल कर लिया। बच्चे के पिता, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने बातचीत की रिकॉर्डिंग और घर के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की और हत्या का केस दर्ज किया।

मामला अदालत में पहुंचा, जहां सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने मां को दोषी ठहराया। अदालत ने इसे एक जघन्य अपराध मानते हुए ज्योति राठौर को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक मां द्वारा अपने ही बच्चे की हत्या समाज के मूल्यों को झकझोर देने वाली है और ऐसे अपराध के प्रति सख्ती जरूरी है।

यह घटना बताती है कि जब रिश्तों में सच्चाई की जगह डर और स्वार्थ ले लेता है, तो उसका अंजाम कितना विनाशकारी हो सकता है। एक मासूम बच्चे की जान चली गई, एक परिवार पूरी तरह टूट गया और एक मां उम्रभर के लिए अपराधबोध और सजा के बीच फंस गई। यह मामला समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि समस्याओं से भागने के बजाय उनका सामना करना ही सही रास्ता होता है, क्योंकि गलत फैसलों की कीमत अक्सर बेगुनाहों को चुकानी पड़ती है।

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