बांग्लादेश में युवा शक्ति का उभार: सत्ता परिवर्तन के बाद अब अगला प्रधानमंत्री तय करने की तैयारी
dailyhulchul
बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक सत्ता में रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाने में अहम भूमिका निभाने वाले देश के युवा अब आने वाले आम चुनावों में निर्णायक शक्ति बनकर उभर रहे हैं। माना जा रहा है कि यही युवा मतदाता बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री का फैसला कर सकते हैं।
पिछले वर्ष छात्रों और युवाओं के नेतृत्व में हुए व्यापक जन आंदोलन ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी। बढ़ती बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दों ने युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया। इसी आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार को सत्ता से हटना पड़ा।
अब बांग्लादेश एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। आगामी संसदीय चुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है और इनमें युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जा रही है। देश की कुल मतदाता आबादी में बड़ी संख्या 18 से 35 वर्ष के युवाओं की है, जिनमें से कई पहली बार खुलकर राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने को तैयार हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पीढ़ी पारंपरिक राजनीति से अलग सोच रखती है। युवा मतदाता अब केवल दलों या चेहरों के भरोसे नहीं, बल्कि नीतियों, पारदर्शिता, जवाबदेही और रोजगार जैसे मुद्दों के आधार पर वोट करना चाहते हैं। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल युवाओं को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना बताया जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता, अविश्वास और पुराने सत्ता ढांचे के समर्थकों की नाराज़गी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
इन सबके बीच एक बात साफ है—बांग्लादेश की राजनीति में युवा अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका में हैं। जिस पीढ़ी ने सरकार गिराने में अहम योगदान दिया, वही अब देश के भविष्य और अगले प्रधानमंत्री को चुनने की ताकत भी रखती है। यह बदलाव बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
टिप्पणियाँ