ट्रंप ने गाजा के लिए “बोर्ड ऑफ पीस” का ऐलान, पाकिस्तान भी सदस्य
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल — “बोर्ड ऑफ पीस” — का औपचारिक ऐलान किया है। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में स्थायी शांति स्थापित करना, युद्धविराम की निगरानी करना और संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण व प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
बोर्ड का उद्देश्य
ट्रंप के अनुसार, यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में दुनिया के अन्य संघर्ष क्षेत्रों में भी शांति प्रयासों के लिए एक मंच के रूप में काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष अब “समाप्ति की दिशा में” है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए निरंतर बातचीत और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी जरूरी है।
पाकिस्तान की भागीदारी
इस बोर्ड में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पाकिस्तान सरकार की ओर से कहा गया है कि वह गाजा में मानवीय सहायता, स्थायी युद्धविराम और पुनर्निर्माण के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता है। साथ ही, पाकिस्तान ने एक बार फिर फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार और 1967 की सीमाओं पर आधारित स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के समर्थन की बात दोहराई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ट्रंप की इस पहल को लेकर वैश्विक स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ देशों ने इसमें रुचि दिखाई है, जबकि कई बड़े वैश्विक खिलाड़ी अभी इस बोर्ड से दूरी बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक ढांचे से अलग एक नया शांति मंच बनाने की कोशिश है, जिसकी प्रभावशीलता आने वाले समय में ही स्पष्ट होगी।
आगे की राह
ट्रंप ने संकेत दिया है कि बोर्ड की प्राथमिकता फिलहाल गाजा पर रहेगी, लेकिन भविष्य में यह अन्य अंतरराष्ट्रीय विवादों में भी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। बोर्ड की संरचना, कार्यप्रणाली और दीर्घकालिक योजनाओं को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
निष्कर्ष
“बोर्ड ऑफ पीस” के गठन के साथ गाजा संकट पर एक नया राजनयिक मंच सामने आया है। पाकिस्तान की भागीदारी ने इस पहल को और अधिक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव और सफलता पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।
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