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अफगान अफगानी अब भारतीय रुपए से मजबूत – एक चौंकाने वाला मुद्रा उलटफेर

dailyhulchul

25 November, 2025 5 मिनट पढ़ें
अफगान अफगानी अब भारतीय रुपए से मजबूत – एक चौंकाने वाला मुद्रा उलटफेर

दक्षिण एशिया के वित्तीय विशेषज्ञों को हैरान करते हुए, अफगान अफगानी (AFN) ने आधिकारिक तौर पर भारतीय रुपए (INR) को पीछे छोड़ दिया है।

आज की स्थिति: 1 अफगान अफगानी = ₹1.343 (दो साल पहले यह सिर्फ ₹0.90 था) यानी 1 लाख अफगानी = ₹1.34 लाख से ज्यादा

यह नाटकीय उछाल तब आया है जब अफगानिस्तान तालिबान के सख्त शासन, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, जमे हुए संपत्तियों और दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है।

अफगानी अचानक इतना मजबूत क्यों हो गया?

  • तालिबान की द अफगानिस्तान बैंक ने डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं के स्थानीय लेन-देन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है
  • देश में अरबों डॉलर की नकद मानवीय सहायता लगातार आ रही है
  • सख्त पूंजी नियंत्रण और बहुत कम आयात के कारण विदेशी मुद्रा की कृत्रिम कमी पैदा हो गई है

अर्थशास्त्री इसे “मुद्रा विरोधाभास” कह रहे हैं – अफगानी मजबूत नहीं इसलिए है क्योंकि अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है, बल्कि इसलिए क्योंकि विदेशी मुद्रा को जानबूझकर सिस्टम से बाहर रखा गया है।

इधर, भारतीय रुपया वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार घाटे और पूंजी निकासी के दबाव में लगातार कमजोर हो रहा है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।

आगे का रास्ता

यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

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