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बांग्लादेश: शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा, मीडिया कार्यालयों पर हमला

dailyhulchul

19 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
बांग्लादेश: शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा, मीडिया कार्यालयों पर हमला

बांग्लादेश में पिछले कुछ घंटों से जारी अशांति ने देश की राजधानी ढाका को अस्थिरता की आग में झोंक दिया है। यह हिंसा 32 वर्षीय युवा नेता और इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद शुरू हुई। हादी पर 12 दिसंबर को नकाबपोश हमलावरों ने गोली चलाई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादी 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में से एक थे, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया था। वे आगामी चुनावों में भी हिस्सा लेने वाले थे।

हादी की मौत की खबर फैलते ही देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए, जो जल्द ही हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने उन संस्थानों और मीडिया हाउसों को निशाना बनाया, जिन्हें वे भारत-समर्थक या पूर्व अवामी लीग सरकार से जुड़ा मानते हैं। सबसे ज्यादा हमले ढाका के करवान बाजार इलाके में हुए, जहां देश के प्रमुख मीडिया कार्यालय स्थित हैं।

मीडिया कार्यालयों पर भीषण हमला

18 दिसंबर की आधी रात के बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने प्रथम आलो और द डेली स्टार के कार्यालयों पर धावा बोल दिया। प्रथम आलो, जो बांग्लादेश का सबसे बड़ा बांग्ला दैनिक अखबार है, में तोड़फोड़ की गई और फर्नीचर तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज बाहर निकालकर आग के हवाले कर दिए गए।

सबसे खतरनाक हमला द डेली स्टार के कार्यालय पर हुआ। अंग्रेजी भाषा का यह प्रमुख अखबार देश में स्वतंत्र पत्रकारिता का प्रतीक माना जाता है। हमलावरों ने पहले ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर तोड़फोड़ की, फिर इमारत में आग लगा दी—तब भी दर्जनों पत्रकार और कर्मचारी अंदर मौजूद थे। घने धुएं के कारण कई लोग फंस गए और सांस लेने में तकलीफ होने लगी।

द डेली स्टार की रिपोर्टर जायमा इस्लाम ने सोशल मीडिया पर अपनी आखिरी पोस्ट में लिखा था, “मैं अब सांस नहीं ले पा रही हूं। बहुत ज्यादा धुआं है। आप मुझे मार रहे हैं।” कई कर्मचारी छत पर बैरिकेड करके अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। फायर ब्रिगेड और बांग्लादेश आर्मी की टीमों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कम से कम 25-30 कर्मचारियों को बचाया गया। किसी की जान नहीं गई, लेकिन कई लोग धुएं से प्रभावित हुए। न्यू एज अखबार के वरिष्ठ संपादक नुरुल कबीर पर भी हमला हुआ।

व्यापक हिंसा और भारत-विरोधी नारे

मीडिया कार्यालयों के अलावा अवामी लीग के कई दफ्तरों, सांस्कृतिक संस्थान छायनट और शेख मुजीबुर रहमान के पैतृक घर पर भी हमले हुए। प्रदर्शनकारियों ने भारत-विरोधी नारे लगाए और चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग पर पत्थरबाजी की।

सरकार की प्रतिक्रिया

अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हिंसा की कड़ी निंदा की है और पत्रकारों के साथ एकजुटता व्यक्त की है। सरकार ने 20 दिसंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। ढाका में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है।

परिणाम और चिंताएं

हमलों के कारण प्रथम आलो और द डेली स्टार ने अपना प्रिंट और ऑनलाइन प्रकाशन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। ढाका में फिलहाल तनाव बना हुआ है, हालांकि बड़ी नई हिंसा की कोई खबर नहीं आई है।

फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों से पहले यह हिंसा प्रेस की स्वतंत्रता और देश की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर रखे हुए है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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