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ब्लिंकिट ने 10-मिनट डिलीवरी फीचर बंद किया, गिग वर्कर्स को मिली राहत

dailyhulchul

13 January, 2026 5 मिनट पढ़ें
ब्लिंकिट ने 10-मिनट डिलीवरी फीचर बंद किया, गिग वर्कर्स को मिली राहत

भारत की त्वरित डिलीवरी सेवा ब्लिंकिट ने अपनी 10-मिनट डिलीवरी सुविधा को बंद करने का फैसला किया है। इस कदम को गिग इकॉनमी में काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से इस फीचर को लेकर यह चिंता जताई जा रही थी कि इतनी कम समय सीमा के कारण डिलीवरी कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।

10-मिनट डिलीवरी की अवधारणा ग्राहकों को बेहद तेज़ सेवा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स और श्रमिक संगठनों का कहना था कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए राइडर्स को तेज़ रफ्तार में वाहन चलाना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, समय पर डिलीवरी न होने पर खराब रेटिंग और जुर्माने का डर भी उनके काम को और तनावपूर्ण बना देता था।

सूत्रों के अनुसार, गिग वर्कर्स की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों को लेकर उठ रही चिंताओं के बाद यह निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार और श्रम से जुड़े विभागों ने भी इस तरह की अत्यधिक तेज़ डिलीवरी सेवाओं पर सवाल उठाए थे और कामगारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

गिग वर्कर्स ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि 10-मिनट डिलीवरी हटने से उन्हें कम दबाव में और सुरक्षित तरीके से काम करने का मौका मिलेगा। इससे न केवल सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक कदम है। गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों की मांगें इससे कहीं व्यापक हैं, जिनमें बेहतर आय, सामाजिक सुरक्षा, बीमा और स्थायी अधिकार शामिल हैं। फिर भी, ब्लिंकिट का यह फैसला गिग वर्कर्स के हित में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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