राजनीति और शासन

दिल्ली में जहरीली धुंध का कहर: AQI 333 पर पहुंचा, हवा फिर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में

dailyhulchul

6 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
दिल्ली में जहरीली धुंध का कहर: AQI 333 पर पहुंचा, हवा फिर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में

सर्दी जैसे-जैसे सख्त होती जा रही है, राष्ट्रीय राजधानी आज सुबह एक बार फिर घने जहरीले स्मॉग की चादर में लिपटकर उठी। शनिवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 333 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है। इंडिया गेट से लेकर यमुना पार तक हर तरफ धुंध की मोटी परत छाई रही, विजिबिलिटी न के बराबर हो गई और सांस लेना भी मुश्किल हो गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सुबह 7 बजे के आंकड़ों के अनुसार:

  • बवाना: 375 (सबसे खराब)
  • गाजीपुर मंडी और आनंद विहार: 366
  • वजीरपुर: 359
  • सोनिया विहार: 352
  • इंडिया गेट-कर्तव्य पथ: 311
  • सबसे कम प्रदूषित रहा NSIT द्वारका: 260 (फिर भी ‘खराब’)

बरापुल्ला फ्लाईओवर और दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं। सुबह के समय कई जगह विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 300 से ऊपर का AQI लगातार रहने पर अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

सरकार की तरफ से पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि इस साल अभी तक एक भी दिन AQI ‘गंभीर प्लस’ (Severe+) श्रेणी में नहीं पहुंचा है, जो पिछले सालों की तुलना में थोड़ी राहत वाली बात है। राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया, “वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM के तहत हमने 95 से ज्यादा उद्योगों को सख्त निर्देश दिए हैं। GRAP लागू है, स्टubble burning पर निगरानी बढ़ाई गई है और दिल्ली-एनसीआर में समन्वित कार्रवाई चल रही है।”

फिर भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये कदम नाकाफी हैं। उनका मांग है कि गैर-जरूरी वाहनों पर तुरंत पाबंदी लगे, निर्माण कार्य रोका जाए और इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े स्तर पर सब्सिडी दी जाए।

मौसम विभाग के अनुसार अगले दो-तीन दिन भी हवा ‘बेहद खराब’ ही रहेगी। दिल्लीवासी एक बार फिर मास्क लगाकर, खिड़कियां बंद रखकर और बाहर निकलने से बचकर किसी तरह सांस लेने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। सवाल वही पुराना है – कब साफ हवा में सांस ले पाएगी दिल्ली?

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

संबंधित आर्टिकल्स

सोशल मीडिया पर फॉलो करें

हर रोज़ ताज़ी खबरें, अपडेट्स और एक्सक्लूसिव कंटेंट के लिए हमें फॉलो करें

टिप्पणियाँ

टिप्पणी छोड़ें

आपकी ईमेल पता प्रकाशित नहीं होगा।