दिल्ली में जहरीली धुंध का कहर: AQI 333 पर पहुंचा, हवा फिर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में
dailyhulchul
सर्दी जैसे-जैसे सख्त होती जा रही है, राष्ट्रीय राजधानी आज सुबह एक बार फिर घने जहरीले स्मॉग की चादर में लिपटकर उठी। शनिवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 333 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है। इंडिया गेट से लेकर यमुना पार तक हर तरफ धुंध की मोटी परत छाई रही, विजिबिलिटी न के बराबर हो गई और सांस लेना भी मुश्किल हो गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सुबह 7 बजे के आंकड़ों के अनुसार:
- बवाना: 375 (सबसे खराब)
- गाजीपुर मंडी और आनंद विहार: 366
- वजीरपुर: 359
- सोनिया विहार: 352
- इंडिया गेट-कर्तव्य पथ: 311
- सबसे कम प्रदूषित रहा NSIT द्वारका: 260 (फिर भी ‘खराब’)
बरापुल्ला फ्लाईओवर और दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं। सुबह के समय कई जगह विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 300 से ऊपर का AQI लगातार रहने पर अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
सरकार की तरफ से पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि इस साल अभी तक एक भी दिन AQI ‘गंभीर प्लस’ (Severe+) श्रेणी में नहीं पहुंचा है, जो पिछले सालों की तुलना में थोड़ी राहत वाली बात है। राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया, “वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM के तहत हमने 95 से ज्यादा उद्योगों को सख्त निर्देश दिए हैं। GRAP लागू है, स्टubble burning पर निगरानी बढ़ाई गई है और दिल्ली-एनसीआर में समन्वित कार्रवाई चल रही है।”
फिर भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये कदम नाकाफी हैं। उनका मांग है कि गैर-जरूरी वाहनों पर तुरंत पाबंदी लगे, निर्माण कार्य रोका जाए और इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े स्तर पर सब्सिडी दी जाए।
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो-तीन दिन भी हवा ‘बेहद खराब’ ही रहेगी। दिल्लीवासी एक बार फिर मास्क लगाकर, खिड़कियां बंद रखकर और बाहर निकलने से बचकर किसी तरह सांस लेने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। सवाल वही पुराना है – कब साफ हवा में सांस ले पाएगी दिल्ली?
मुख्य बिंदु
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- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
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