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धर्मशाला कॉलेज छात्रा की मौत: यौन उत्पीड़न और रैगिंग के आरोप, प्रोफेसर समेत 4 पर मामला दर्ज

dailyhulchul

2 January, 2026 5 मिनट पढ़ें
धर्मशाला कॉलेज छात्रा की मौत: यौन उत्पीड़न और रैगिंग के आरोप, प्रोफेसर समेत 4 पर मामला दर्ज

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी डिग्री कॉलेज की 19 वर्षीय छात्रा की कथित रूप से यौन उत्पीड़न, रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के बाद मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने एक कॉलेज प्रोफेसर और तीन छात्राओं समेत कुल चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

मृतका कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी और परिजनों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद परेशान थी। आरोप है कि कॉलेज की तीन छात्राओं ने उसके साथ रैगिंग की, मारपीट की और उसे लगातार डराया-धमकाया। इसके साथ ही, एक प्रोफेसर पर भी छात्रा के साथ अश्लील व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

परिवार का कहना है कि इन घटनाओं के बाद छात्रा की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। उसे पहले स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, बाद में बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि कॉलेज में हो रहे उत्पीड़न और दबाव ने उसकी हालत को और ज्यादा खराब कर दिया।

छात्रा की मौत के बाद उसके मोबाइल फोन से एक वीडियो सामने आया, जिसमें उसने अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न का जिक्र किया था। इसी वीडियो के आधार पर परिवार ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने यौन उत्पीड़न, जानबूझकर चोट पहुंचाने, मानसिक प्रताड़ना और रैगिंग से जुड़े कानूनों के तहत केस दर्ज किया है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कॉलेजों में रैगिंग और उत्पीड़न जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी, प्रभावी शिकायत प्रणाली और समय पर कार्रवाई कितनी जरूरी है।

मुख्य बिंदु

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  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
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"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
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