आई-पैक छापेमारी विवाद: ईडी का बयान और ममता बनर्जी पर आरोप
dailyhulchul
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC (Indian Political Action Committee) से जुड़े ठिकानों पर हुई छापेमारी को लेकर अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अपने साथ ले लिए, जिससे चल रही जांच में बाधा उत्पन्न हुई।
ईडी का दावा
ईडी के अनुसार, यह छापेमारी कोयला तस्करी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की जा रही थी। एजेंसी ने बताया कि कोलकाता और दिल्ली सहित I-PAC से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर तलाशी ली जा रही थी और कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रही थी।
ईडी का आरोप है कि इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पहले वे I-PAC के एक वरिष्ठ अधिकारी के आवास पर गईं और वहां से कथित तौर पर कुछ महत्वपूर्ण कागज़ात और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले लीं। इसके बाद वे I-PAC के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय भी पहुंचीं, जहां से भी कुछ दस्तावेज़ हटाए जाने का दावा किया गया है।
एजेंसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत चल रही जांच प्रभावित हुई है।
राजनीतिक गतिविधियों से इनकार
ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल या चुनावी प्रक्रिया से संबंधित नहीं है। एजेंसी के अनुसार, मामला वर्ष 2020 में दर्ज एक पुराने केस से जुड़ा है और इसमें हवाला लेन-देन और अवैध धन के इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि छापेमारी के दौरान तृणमूल कांग्रेस की रणनीति से जुड़े दस्तावेज़ और चुनावी डेटा को निशाना बनाया गया।
ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने केवल पार्टी से जुड़े कागज़ात और हार्ड डिस्क वापस ली हैं और सवाल उठाया कि क्या किसी केंद्रीय एजेंसी को राजनीतिक दलों के आंतरिक दस्तावेज़ जब्त करने का अधिकार है? उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया।
सियासी घमासान
इस पूरे मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस और तनाव पैदा कर दिया है। एक ओर जहां विपक्षी दल मुख्यमंत्री के कदमों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्र सरकार द्वारा एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण बता रही है।
फिलहाल मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। आगे अदालत और जांच एजेंसियों के रुख से इस विवाद की दिशा तय होगी।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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