वैश्विक संघर्ष

इस्राइली हमलों के बीच हिज़बुल्लाह ने अपनी प्रतिक्रिया पर विचार किया

dailyhulchul

24 November, 2025 5 मिनट पढ़ें
इस्राइली हमलों के बीच हिज़बुल्लाह ने अपनी प्रतिक्रिया पर विचार किया

गाजा पर इस्राइली हवाई हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और इस बीच हिज़बुल्लाह ने कहा है कि वह इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया पर विचार कर रहा है। इस्राइली रक्षा बलों (IDF) ने सप्ताहांत में गाजा के कई हिस्सों में भारी हवाई हमले किए हैं, जिनमें हमास के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हमलों में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे रॉकेट लॉन्चिंग साइट्स और हथियार डिपो को नष्ट किया गया। इन हमलों में सैकड़ों फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं।

गाजा में लगातार हमले और नागरिक हताहत

IDF की यह सैन्य कार्यवाही पिछले कई हफ्तों से जारी है, जिसमें इस्राइल ने हमास के सैन्य ढांचे को नष्ट करने का संकल्प लिया है। इस्राइल का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन बढ़ती नागरिक हताहतों के कारण वैश्विक स्तर पर इसकी आलोचना हो रही है। गाजा के अस्पताल अत्यधिक दबाव में हैं और चिकित्सा आपूर्ति की भारी कमी हो गई है। संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय संकट की चेतावनी दी है, और स्थिति को तुरंत सुधारने के लिए संघर्षविराम की अपील की है।

हिज़बुल्लाह की स्थिति और संभावित सैन्य प्रतिक्रिया

लेबनान स्थित हिज़बुल्लाह, जो हमास का एक प्रमुख सहयोगी है, इस स्थिति को बारीकी से देख रहा है। हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह ने इस्राइली हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि “प्रतिरोध” गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ हो रही हिंसा को नहीं देख सकता। हालांकि, हिज़बुल्लाह ने अब तक सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है, लेकिन नसरल्लाह के बयान से यह संकेत मिलता है कि उनका समूह इस्राइल के खिलाफ प्रतिक्रिया देने पर विचार कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस स्थिति का और अधिक बिगड़ना जारी रहा, तो हिज़बुल्लाह अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में हिज़बुल्लाह ने बड़ी सैन्य कार्रवाई से बचने की कोशिश की है, लेकिन गाजा में बढ़ते तनाव ने उसे एक और संघर्ष में कूदने के लिए उकसाया है। हिज़बुल्लाह की किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई इज़राइल और लेबनान की सीमा पर संघर्ष को बढ़ा सकती है, जो क्षेत्रीय संकट को और जटिल बना सकती है।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं और बढ़ती हुई तनावपूर्ण स्थिति

वैश्विक समुदाय ने इस हिंसा को लेकर गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने तुरंत संघर्षविराम की अपील की है और इस्राइली और हिज़बुल्लाह दोनों से अतिरिक्त उत्तेजना से बचने का आग्रह किया है। अरब देशों, जैसे कि मिस्र और कतर, ने भी संघर्ष समाप्त करने की मांग की है, और गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए शांति की आवश्यकता जताई है।

मध्य-पूर्व में, गाजा के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और संघर्षविराम की मांग तेज हो रही है। हालांकि, इस्राइल अपने सैन्य अभियानों को जारी रखने की बात कर रहा है, यह कहते हुए कि हमास के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा: हिज़बुल्लाह की भागीदारी?

गाजा में बढ़ती हिंसा के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हिज़बुल्लाह इस संघर्ष में शामिल होगा? अगर हिज़बुल्लाह सैन्य कार्रवाई करता है, तो यह इस्राइली-लेबनानी सीमा पर संघर्ष को और बढ़ा सकता है, और यह अन्य क्षेत्रीय शक्तियों को भी इस संघर्ष में घसीट सकता है, जैसे कि सीरिया और ईरान, जो हिज़बुल्लाह के प्रमुख समर्थक हैं। यदि हिज़बुल्लाह की भागीदारी बढ़ती है, तो यह क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक युद्ध का कारण बन सकता है, जिससे संकट और गहरा हो जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।

आगे का रास्ता

यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

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