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ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शन तेज, सड़कों पर उतरी जनता

dailyhulchul

9 January, 2026 5 मिनट पढ़ें
ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शन तेज, सड़कों पर उतरी जनता

ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सर्वोच्च नेता आयातोल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक दमन के खिलाफ अपना गुस्सा खुलकर जाहिर कर रहे हैं।

शुरुआत में ये प्रदर्शन आर्थिक समस्याओं को लेकर हुए थे, लेकिन अब यह आंदोलन पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया और सड़कों पर आगजनी की घटनाएँ भी सामने आई हैं, जिससे देश में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और कई शहरों में कर्फ्यू जैसे हालात नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और खुलेआम शासन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

इस बीच, ईरान के निर्वासित पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पहलावी ने जनता से एकजुट होकर विरोध को और मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने इसे ईरान में बदलाव का निर्णायक क्षण बताया और लोगों से डर के बिना सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। उनके इस संदेश के बाद विरोध-प्रदर्शनों को और बल मिला है।

वहीं, सर्वोच्च नेता खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ये लोग देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। आम नागरिकों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है और देश एक बड़े राजनीतिक मोड़ की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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