ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी, तीन दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित – तेजी से बढ़ती मौतें और अमेरिका‑ईरान तनाव
dailyhulchul
ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन मंगलवार को 15वें दिन में भी जारी हैं। आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन अब व्यापक राजनीतिक असंत्योष का रूप ले चुके हैं, जिसके चलते सैकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं और सरकार ने तीन दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के अनुसार, अब तक कम से कम 538 से 544 लोगों की मौत हो चुकी है और 10,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मृतकों में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल दोनों शामिल हैं, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्दुल्ला अरबग़ची ने विरोध प्रदर्शनों को “कुल नियंत्रण में” होने का दावा करते हुए कहा कि हालात को “विदेशी तत्वों” ने भड़काया है और हिंसा को बढ़ावा दिया गया ताकि अमेरिका को हस्तक्षेप का बहाना मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के हिंसक रुख ने स्थिति को और भयंकर बना दिया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान संवाद के लिए तैयार है और बातचीत के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक दमन जारी रखती है तो अमेरिका “कड़े विकल्पों” पर विचार कर सकता है, जिसमें सैन्य और सायबर कार्रवाई शामिल हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी किसी कार्रवाई का रूप क्या होगा।
तेहरान में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे देश के अंदर की वास्तविक स्थिति का आकलन और कठिन हो गया है। हिंसक झड़पों के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “देश के दुश्मनों का हिस्सा” करार दिया है और कहा है कि विरोध असंतोष फैलाने वाले लोगों द्वारा बढ़ाया जा रहा है।
प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुआ था और अब देश के अधिकांश बड़े शहरों में फैला हुआ है। विरोध आंदोलन में शामिल लोग सिर्फ़ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और सामाजिक आज़ादी की मांग कर रहे हैं, जिससे यह ईरान के लिए अब तक की सबसे गंभीर अशांति का रूप ले चुका है।
संक्षेप में — ईरान में आर्थिक और राजनीतिक असंतोष ने बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध में बदल दिया है, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की मौत हो चुकी है, हज़ारों गिरफ्तार हैं, और सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। अमेरिकी सरकार और ईरानी नेतृत्व के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन तनाव और अस्थिरता दोनों ही गहराते जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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