नॉर्थ कैरोलिना में इमीग्रेशन छापों ने शार्लोट में मचाई हलचल
dailyhulchul
फेडरल अधिकारियों ने शार्लोट, नॉर्थ कैरोलिना में बड़े पैमाने पर इमीग्रेशन ऑपरेशन शुरू किया है, जिसने शहर की अप्रवासी समुदायों में भय और विवाद खड़ा कर दिया है। इस अभियान को “ऑपरेशन शार्लोट्स वेब” नाम दिया गया है और इसका उद्देश्य अमेरिका में गैरकानूनी रूप से रह रहे व्यक्तियों को निशाना बनाना है।
ऑपरेशन का विवरण
होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) और यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) सार्वजनिक स्थानों पर गिरफ्तारियां कर रहे हैं, जिनमें अपार्टमेंट, स्थानीय व्यवसाय और पूजा स्थलों के आसपास के इलाके शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान “क्रिमिनल गैरकानूनी प्रवासियों” को हटाने के लिए किया जा रहा है और हालिया हिंसक घटनाओं को इसका कारण बताया गया है।
निवासियों पर प्रभाव
इन छापों ने व्यापक डर पैदा कर दिया है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि गिरफ्तारियों के दौरान अधिकारियों ने बल का इस्तेमाल किया और कुछ अमेरिकी नागरिकों को भी अस्थायी रूप से हिरासत में लिया गया। कई लैटिनो-स्वामित्व वाले व्यवसाय अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं और परिवार अपने घर छोड़ने में डर महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
शार्लोट की मेयर वी लाइलेस और नॉर्थ कैरोलिना के अधिकारी इन छापों की आलोचना कर रहे हैं। गवर्नर जोश स्टीन ने कहा कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से अधिकांश का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और कुछ अमेरिकी नागरिक भी हैं। शहर के नेताओं का कहना है कि यह ऑपरेशन अनावश्यक डर और असुरक्षा पैदा कर रहा है।
नाम को लेकर विवाद
“शार्लोट्स वेब” नाम पर भी विवाद हुआ है। ई.बी. व्हाइट की पोती, जिन्होंने Charlotte’s Web लिखी थी, ने इस नाम का इमीग्रेशन अभियान के लिए इस्तेमाल होने का विरोध किया है। उनका कहना है कि किताब की दोस्ती और करुणा की भावना के विपरीत इस अभियान में डर और बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राजनीतिक संदर्भ
ये छापे देशव्यापी इमीग्रेशन प्रवर्तन अभियान का हिस्सा हैं, विशेष रूप से उन शहरों में जहां डेमोक्रेटिक अधिकारी हैं। फेडरल अधिकारी इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हैं, जबकि आलोचक नागरिक अधिकारों के उल्लंघन की चेतावनी दे रहे हैं।
समुदाय की प्रतिक्रिया
स्थानीय संगठन और अधिवक्ता लोगों को शांत रहने और अपने अधिकार जानने की सलाह दे रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञ इसे करीब से देख रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि सीमा से दूर किए गए ये छापे संवैधानिक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु
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