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सूडानः आरएसएफ के ड्रोन हमले में दर्जनों बच्चे मारे गए, किंडरगार्टन पर जानबूझकर किया गया हमला

dailyhulchul

5 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
सूडानः आरएसएफ के ड्रोन हमले में दर्जनों बच्चे मारे गए, किंडरगार्टन पर जानबूझकर किया गया हमला

कालोजी, सूडान – 5 दिसंबर 2025

सूडान की तबाह होती गृहयुद्ध में एक भयावह घटना में परामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) ने दक्षिण कोरडोफान के कालोजी शहर में एक किंडरगार्टन और नागरिक इलाकों पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कम से कम 47 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर छोटे बच्चे थे, और करीब 50 लोग घायल हो गए। यह जानकारी सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ) के सूत्रों ने दी।

हमलावरों ने पहले किंडरगार्टन पर बमबारी की, फिर लौटकर उन नागरिकों पर भी हमला किया जो घायलों की मदद के लिए इकट्ठा हुए थे। स्थानीय अस्पताल और सरकारी इमारत को भी निशाना बनाया गया।

सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने इसे “अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन” बताया और कहा कि यह नागरिकों और जरूरी ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी है। शुरुआती रिपोर्ट में 9 लोगों की मौत बताई गई थी, जिनमें 4 बच्चे और 2 महिलाएं शामिल थीं, लेकिन बाद में मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई।

कोरडोफान में बढ़ते अत्याचार

यह हमला कोरडोफान क्षेत्र में तेज़ होती लड़ाई के बीच हुआ है। आरएसएफ ने हाल के हफ्तों में तेज़ प्रगति की है और उत्तर कोरडोफान का बारा शहर अक्टूबर से अपने कब्जे में रखा हुआ है। इस हफ्ते पश्चिम कोरडोफान का बबनूसा शहर भी कथित तौर पर कब्जा लिया, हालांकि एसएएफ ने इसे खारिज किया है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आरएसएफ के अभियान शुरू होने के बाद से कोरडोफान में कम से कम 269 नागरिक मारे जा चुके हैं। हवाई बमबारी, तोपखाने के गोले, सामूहिक हत्याएं, यौन हिंसा और बच्चों की जबरन भर्ती की खबरें आ रही हैं।

यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने इसे “बेहद चौंकाने वाला” बताया और कहा कि एल-फाशेर (उत्तर दारफूर) में हुए नरसंहार के तुरंत बाद कोरडोफान में भी वही इतिहास दोहराया जा रहा है।

तीन साल से चल रहा खूनी गृहयुद्ध

अप्रैल 2023 से चला आ रहा सूडान का गृहयुद्ध अब अपने तीसरे साल में है। इस जंग में दसियों हज़ार लोग मारे जा चुके हैं और 1 करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन और भुखमरी संकट यहीं है।

दोनों पक्षों – सेना और आरएसएफ – पर युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप हैं। इस हफ्ते ही यूरोपीय संघ ने आरएसएफ के उप-कमांडर अब्देलरहीम दगालो (हेमेती के भाई) पर नागरिकों पर हमलों के लिए प्रतिबंध लगाए हैं।

कालोजी में मलबे के बीच बचाव दल अब भी शव निकाल रहे हैं। एक किंडरगार्टन, जो कभी बच्चों की हंसी से गूंजता था, आज इस युद्ध की बेरहमी का सबसे दर्दनाक प्रतीक बन गया है।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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