बुर्का न पहनने पर गुस्साए पति ने पत्नी और दो मासूम बेटियों की कर दी हत्या, शव घर के सेप्टिक टैंक में दफनाए
dailyhulchul
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कांधला थाना क्षेत्र के गढ़ी दौलत गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो नाबालिग बेटियों की बेरहमी से हत्या कर दी और उनके शवों को घर के आंगन में खुदवाए गए सेप्टिक टैंक के गड्ढे में दफना दिया। आरोपी की पहचान फारूक (या मोहम्मद फारुख) के रूप में हुई है, जो शादी-विवाह में खाना बनाने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार, हत्या की मुख्य वजह घरेलू विवाद था। फारूक अपनी पत्नी ताहिरा (उम्र करीब 32-35 साल) पर बुर्का या पर्दा करने का दबाव बनाता था। एक महीने पहले ताहिरा बिना बुर्का पहने अपने मायके गई थीं, जिससे फारूक बेहद नाराज था। दंपति के बीच लंबे समय से झगड़े चल रहे थे और ताहिरा पहले भी घरेलू कलह के कारण मायके चली गई थीं।
हत्या कैसे हुई?
फारूक के कबूलनामे के मुताबिक, 10 दिसंबर की रात करीब 12 बजे उसने पत्नी ताहिरा को चाय बनाने के बहाने जगाया और अवैध तमंचे से गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर बड़ी बेटी आफरीन (उम्र 14 साल) जाग गई, तो फारूक ने उसे भी गोली मार दी। छोटी बेटी सहरीन (उम्र 6-7 साल) को गला दबाकर मार डाला ताकि कोई गवाह न बचे। इसके बाद उसने तीनों शवों को घर के आंगन में शौचालय निर्माण के लिए पहले से खुदवाए 7-9 फीट गहरे गड्ढे में डाल दिया और ऊपर से मिट्टी व सीमेंट डालकर फर्श बिछा दिया।
मामला कैसे खुला?
ताहिरा और दोनों बेटियां 9-10 दिसंबर से लापता थीं। फारूक के पिता दाऊद ने संदेह होने पर पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पूछताछ में फारूक के बयान बार-बार बदलते देख पुलिस को शक हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर फारूक ने अपराध कबूल कर लिया। शामली एसपी एन.पी. सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 16 दिसंबर को घर में खुदाई कराई और तीनों शव बरामद कर लिए। अवैध हथियार भी बरामद करने की कोशिश की जा रही है।
फारूक के पास पांच बच्चे थे, लेकिन इस घटना में सिर्फ पत्नी और दो बेटियां ही मारी गईं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
यह घटना घरेलू हिंसा और महिलाओं पर थोपे जाने वाले दबाव की कड़वी सच्चाई उजागर करती है। इलाके में माहौल गमगीन है और लोग इस हैवानियत से स्तब्ध हैं। पुलिस आगे की जांच जारी रखे हुए है।
मुख्य बिंदु
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- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
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