इज़रायल–गाज़ा युद्ध: बड़ी अपडेट | आपकी न्यूज़ रिपोर्ट पार्ट-बाय-पार्ट
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हमास का बयान — “UN प्रस्ताव हमारी मांगों पर खरा नहीं उतरता”
गाज़ा पर इज़रायल की कार्रवाई के बीच, हमास ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नए प्रस्ताव को सख्त शब्दों में खारिज कर दिया है।
हमास का कहना है कि यह प्रस्ताव फिलिस्तीनी जनता की राजनीतिक व मानवीय ज़रूरतों को पूरा नहीं करता।
UNSC ने अमेरिका की सीज़फायर योजना को मंज़ूरी दी थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती का प्रावधान शामिल है।
गाज़ा में मानवीय स्थिति भयावह — 3 लाख टेंट की ज़रूरत
गाज़ा की स्थानीय अधिकारियों ने बताया है कि ठंड बढ़ते ही लाखों विस्थापित लोगों को कम से कम 3,00,000 टेंट की आवश्यकता है।
अब तक इज़रायल के हमलों में 69,483 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, और 1,70,706 घायल हुए हैं।
7 अक्टूबर 2023 के हमले में 1,139 इज़रायली नागरिक मारे गए थे और तकरीबन 200 लोगों को बंधक बनाया गया था।
UN सुरक्षा परिषद में देशों ने क्या कहा?
UK:
- अमेरिका की योजना को आगे बढ़ाने के लिए वोट दिया
- सभी क्रॉसिंग खोलने और मदद पहुंचाने पर ज़ोर
फ्रांस:
- “शांति प्रयासों को सपोर्ट” करने के लिए प्रस्ताव का समर्थन
- मानवीय सहायता और हमास के निरस्त्रीकरण पर ज़ोर
दक्षिण कोरिया:
- “बोर्ड ऑफ पीस” और “ISF” को सकारात्मक कदम बताया
स्लोवेनिया:
- इसे स्थाई शांति का “सबसे बड़ा मौका” बताया
डेनमार्क:
- गाज़ा और वेस्ट बैंक को एकजुट करने की दिशा में अहम कदम बताया
अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) — UN नियमों के दायरे में नहीं
UN विश्लेषक डेनियल फोर्टी के अनुसार:
- ISF UN ब्लू हेलमेट मिशन जैसा नहीं होगा
- इसे UN नहीं, बल्कि इच्छुक देशों की गठबंधन–फोर्स लीड करेगी
- फोर्स अपने नियमों के तहत काम करेगी, UN प्रक्रिया का पालन आवश्यक नहीं
- यह बल गाज़ा में कानून–व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी कर सकेगा
साउथ अफ्रीका ने उठाए सवाल — “फिलिस्तीनियों को हटाने की साजिश”
दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने कहा:
- गाज़ा से लोगों को उनके देश भेजना एक “साफ़ एजेंडा” जैसा लगता है
- इसे फिलिस्तीनियों को पुश करते हुए गाज़ा–वेस्ट बैंक से खाली कराने की कोशिश बताया
- दक्षिण अफ्रीका ने कहा कि वे अब और ऐसी फ्लाइटें स्वीकार नहीं करेंगे
फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) ने UN प्रस्ताव का स्वागत किया
रमल्लाह स्थित PA ने इस प्रस्ताव को सकारात्मक बताया।
उनका कहना है कि प्रस्ताव:
- गाज़ा में स्थायी और व्यापक युद्धविराम की ओर ले जाता है
- मानवीय सहायता की निर्बाध डिलीवरी सुनिश्चित करता है
- फिलिस्तीनियों के स्वतंत्र राज्य और आत्मनिर्णय के अधिकार की पुष्टि करता है
PA ने अमेरिका और UN के साथ पूरी तरह सहयोग करने की इच्छा जताई है।
पूर्व UN अधिकारी ने कहा — “UN के लिए शर्म का दिन”
UN के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी क्रेग मोकहीबर ने कहा:
- “आज सुरक्षा परिषद के लिए शर्म का दिन है।”
- किसी देश ने हिम्मत नहीं दिखाई कि अमेरिका–इज़रायल की योजना का विरोध करे
उन्होंने इस प्रस्ताव को “औपनिवेशिक एजेंडा” बताया।
UN प्रस्ताव में क्या है?
UNSC द्वारा पास प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
- बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना — जो गाज़ा की शासन व्यवस्था, सुरक्षा, पुनर्निर्माण और जनता की सेवाओं की देखरेख करेगा
- एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती
- ISF गाज़ा को डिमिलिट्राइज करेगा, हथियार नष्ट करेगा और फिलिस्तीनी पुलिस को ट्रेन करेगा
- मंडेट 2027 के अंत तक लागू रहेगा
- UN की भूमिका सीमित, बोर्ड की संरचना अस्पष्ट
रूस और चीन ने मतदान से परहेज़ किया।
हमास का कड़ा विरोध — “यह अंतरराष्ट्रीय संरक्षकता थोपने की कोशिश”
हमास ने कहा:
- प्रस्ताव फिलिस्तीनियों की मांगों पर खरा नहीं उतरता
- अंतरराष्ट्रीय फोर्स इज़रेल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाएगी
- फोर्स सिर्फ सीमा पर, UN के पूर्ण नियंत्रण में तैनात होनी चाहिए
- गाज़ा में प्रतिरोध को निरस्त्र करने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य
हमास ने जोर देकर कहा कि उन्हें: - तुरंत युद्ध रोकने,
- गाज़ा का पुनर्निर्माण,
- कब्ज़े का अंत,
- और स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य का अधिकार चाहिए।
मुख्य बिंदु
- युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
- 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
- क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं
"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"
सांख्यिकी और तथ्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों में और भी मजबूत होगा। डिजिटल लिटरेसी और राजनीतिक जागरूकता का यह संयोजन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।
आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी न केवल वोट देने में रुचि रखती है, बल्कि नीति निर्माण, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है। राजनीतिक दलों और सरकारों को इस बदलते परिदृश्य को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।
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