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थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर भयंकर झड़पें फिर शुरू: सैनिकों और नागरिकों की मौत

dailyhulchul

9 December, 2025 5 मिनट पढ़ें

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवादित सीमा पर एक बार फिर भयंकर गोलीबारी शुरू हो गई है। दोनों पक्षों ने सैनिकों और आम नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। जुलाई में हुई नाजुक युद्धविराम समझौता पूरी तरह टूट चुका है। प्राचीन प्रीह विहार और प्रसात ता मोआन थोन मंदिरों के आसपास का इलाका फिर युद्धक्षेत्र बन गया है।

रविवार से अब तक कम से कम 7 कंबोडियाई नागरिक और 3 थाई सैनिक मारे जा चुके हैं। तोपों से गोले बरसाए जा रहे हैं, ड्रोन हमले हो रहे हैं और हजारों लोग अपना घर छोड़कर भाग रहे हैं।

ताज़ा घटनाक्रम (सबसे नया पहले)

  • सुबह 7:00 बजे: कंबोडिया ने थाई सेना पर कई जगहों पर फिर हमला करने का आरोप लगाया, दो और लोग मारे गए। थाईलैंड ने भी अपने दो सैनिकों की मौत की पुष्टि की।
  • सुबह 6:50 बजे: बांते मीनचेय प्रांत के पोइपेट शहर में 5 इलाकों के लोगों को तुरंत सुरक्षित जगहों पर जाने के आदेश।
  • सुबह 6:45 बजे: कंबोडिया के पूर्व नेता हून सेन ने कहा कि उनकी सेना ने 24 घंटे तक इंतज़ार किया ताकि नागरिक सुरक्षित निकल सकें, उसके बाद जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने इसे “आक्रमणकारी दुश्मन” के खिलाफ रक्षा बताया।
  • 11,000 से ज्यादा कंबोडियाई नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
  • कंबोडिया के शिक्षा मंत्रालय ने प्रीह विहार प्रांत में स्कूल बंद कर दिए।
  • थाई सेना ने बताया कि प्रीह विहार मंदिर के पास ग्रेनेड और सुरिन प्रांत में अप्रत्यक्ष गोलीबारी से दो सैनिक शहीद हुए। कुल तीन थाई सैनिक अब तक मारे गए।
  • हून सेन ने कहा: “हम शांति चाहते हैं, लेकिन अगर दुश्मन हमारे क्षेत्र में घुसेगा तो कड़ा जवाब देंगे।”

पृष्ठभूमि

2008 में यूनेस्को ने प्रीह विहार मंदिर को कंबोडिया की संपत्ति घोषित किया था, जिसे थाईलैंड ने कभी स्वीकार नहीं किया। 2011 में भी इसी इलाके में भयंकर लड़ाई हुई थी जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे।

जून 2025 में कंबोडिया ने थाई सामान पर पाबंदी लगाई, थाईलैंड ने जवाब में कंबोडिया को इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिया। जुलाई में थाई प्रधानमंत्री पेटोंगतार्न शिनावात्रा को हून सेन से लीक हुई फोन कॉल के कारण निलंबित करना पड़ा था।

अभी की स्थिति

लड़ाई जारी है। दोनों देश एक-दूसरे पर “आक्रामकता” का आरोप लगा रहे हैं। आसियान देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन अभी कोई मध्यस्थता नहीं हो रही।

क्षेत्र में तनाव चरम पर है और और भयंकर युद्ध की आशंका बनी हुई है।

अल जज़ीरा से ली गई ताज़ा ख़बर

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
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