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यूएई में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, दुबई और अबू धाबी सबसे ज्यादा प्रभावित

dailyhulchul

19 December, 2025 5 मिनट पढ़ें
यूएई में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, दुबई और अबू धाबी सबसे ज्यादा प्रभावित

संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में तेज़ और लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। यूएई के प्रमुख अमीरातों में शामिल दुबई, अबू धाबी और शारजाह में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

भारी बारिश से व्यवस्था चरमराई

मौसम विभाग के अनुसार यह बारिश हाल के महीनों में सबसे तेज़ मानी जा रही है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जल निकासी व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है। कई रिपोर्ट्स में इसकी तुलना अप्रैल 2024 की ऐतिहासिक बारिश से की जा रही है, जब यूएई में 75 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया था।

दुबई समेत कई अमीरातों में असर

यूएई के दुबई अमीरात में सड़कों पर पानी भर गया है, अंडरपास जलमग्न हो गए हैं और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। अबू धाबी और शारजाह में भी कई निचले इलाकों में भारी जलभराव दर्ज किया गया है।

दुबई और शारजाह एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द या विलंबित की गई हैं। फेरी सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं, जबकि रेगिस्तानी सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।

प्रशासन अलर्ट मोड में

दुबई पुलिस, सिविल डिफेंस और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह अलर्ट पर हैं। फंसे हुए वाहनों को सुरक्षित निकालने और जोखिम वाले इलाकों से लोगों को हटाने का काम जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक बेहद ज़रूरी न हो, घर से बाहर न निकलें।

खतरे की चेतावनी

अधिकारियों ने अचानक बाढ़, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और पुराने रिहायशी इलाकों में पानी भरने की चेतावनी जारी की है। मौसम की स्थिति 20 दिसंबर तक अस्थिर बने रहने की आशंका है।

जनहानि की कोई पुष्टि नहीं

फिलहाल इस बारिश से किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। यह स्थिति अप्रैल 2024 की बाढ़ से अलग है, जिसमें कई लोगों की जान गई थी।

बदलते मौसम की चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में बार-बार हो रही अत्यधिक बारिश जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर आपदा प्रबंधन की आवश्यकता होगी।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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