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शीर्षक: ईरान पर हमले को लेकर नेतन्याहू का बचाव, लेकिन लंबा खिंच सकता है संघर्ष

dailyhulchul

3 March, 2026 5 मिनट पढ़ें
शीर्षक: ईरान पर हमले को लेकर नेतन्याहू का बचाव, लेकिन लंबा खिंच सकता है संघर्ष

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमले के फैसले का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने इस कार्रवाई को एक “तेज़ और निर्णायक कदम” बताया है, न कि एक अंतहीन युद्ध प्रक्रिया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंच सकता है।

नेतन्याहू का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब भी कोई युद्ध लंबा चलता है, तो अमेरिका में उसके प्रति राजनीतिक और जनसमर्थन धीरे-धीरे कम होने लगता है।

पूर्व में इराक और अफगानिस्तान जैसे संघर्षों में अमेरिका ने लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाए, जिनकी लागत भारी रही और जिन पर घरेलू राजनीति में तीखी बहस हुई। ऐसे में यदि ईरान के साथ टकराव लंबा खिंचता है, तो अमेरिकी प्रशासन को आर्थिक संसाधनों, रक्षा उत्पादन क्षमता और जनता के समर्थन जैसी व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका और इज़राइल के बीच लंबे समय से मजबूत सैन्य और रणनीतिक संबंध रहे हैं। अमेरिका इज़राइल को सैन्य सहायता और हथियार मुहैया कराता रहा है। लेकिन वाशिंगटन में यह बहस भी जारी है कि क्या अमेरिका को हर स्थिति में इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों का स्वतः समर्थन करना चाहिए।

इसके साथ ही, अमेरिका पहले से ही यूक्रेन को हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है, जो रूस के साथ जारी युद्ध में उलझा हुआ है। इस वजह से अमेरिकी संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। रक्षा बजट, हथियार निर्माण और वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाना अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही सार्वजनिक रूप से इस अभियान को लेकर आत्मविश्वास जताते हों और समर्थन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन किसी भी दीर्घकालिक सैन्य अभियान की सफलता केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति पर नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत, औद्योगिक उत्पादन और जनमत पर भी निर्भर करती है।

ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संघर्ष वास्तव में “तेज़ और निर्णायक” साबित होता है, जैसा नेतन्याहू दावा कर रहे हैं, या फिर यह एक लंबी और जटिल भू-राजनीतिक लड़ाई में बदल जाता है, जिसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

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