संवाद से उठाएं मुद्दे, सदन में बाधा न डालें: सीएम योगी आदित्यनाथ
dailyhulchul
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से पहले सभी दलों के विधायकों से संयम और संवाद की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका व्यवस्थित और मर्यादित होना चाहिए। यदि किसी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है, तो उसे सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय संवाद और चर्चा के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। यहां होने वाली हर बहस और निर्णय का सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ता है। ऐसे में हंगामा या अव्यवस्था से न केवल कार्यवाही प्रभावित होती है, बल्कि महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा भी बाधित होती है। उन्होंने सभी सदस्यों से अपेक्षा जताई कि वे सदन की गरिमा बनाए रखते हुए प्रदेशहित में रचनात्मक भूमिका निभाएं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2026-27 के बजट सत्र की शुरुआत हो रही है। इस सत्र में राज्य का सामान्य बजट और आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का दावा है कि बीते वर्षों में विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश और सामाजिक योजनाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, और आगामी बजट में इन्हीं उपलब्धियों को आगे बढ़ाने की रूपरेखा रखी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विपक्ष के सुझावों का स्वागत करती है और जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी दोहराया कि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है, जिससे मतभेदों का समाधान निकल सकता है। उनका कहना था कि जनता ने सभी जनप्रतिनिधियों को विकास और समस्याओं के समाधान के लिए चुना है, इसलिए सदन में समय का सदुपयोग होना चाहिए।
सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था, रोजगार, कृषि, निवेश और बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से प्रदेश की विकास दर, राजस्व संग्रह और विभिन्न योजनाओं की प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत करेगी।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित इस सत्र को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आने वाले समय में कई अहम नीतिगत निर्णय लिए जाने की संभावना है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार सदन को संवाद और सहयोग के माध्यम से संचालित करना चाहती है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ने यह रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को स्थान है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका जिम्मेदार और मर्यादित होना चाहिए। सदन में सकारात्मक चर्चा और स्वस्थ बहस से ही प्रदेश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
टिप्पणियाँ