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दक्षिण-पूर्व एशिया में भयानक बाढ़ से 1,000 से अधिक लोगों की मौत, लाखों बेघर

dailyhulchul

1 December, 2025 5 मिनट पढ़ें

जकार्ता, 1 दिसंबर 2025 – पिछले सात दिनों में इंडोनेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और मलेशिया में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से 1,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह प्राकृतिक आपदा इतनी भयावह है कि पूरा इलाका कीचड़ में दब गया, घर डूब गए और बचे हुए लोग भोजन व साफ पानी की तलाश में भटक रहे हैं।

According to the latest data:

  • इंडोनेशिया में 604 मौतें
  • श्रीलंका में 335 मौतें
  • थाईलैंड में 176 मौतें
  • मलेशिया में 3 मौतें

सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

इंडोनेशिया: सबसे ज्यादा नुकसान, राष्ट्रपति बोले – “सबसे बुरा दौर गुजर गया”

इंडोनेशिया सबसे ज्यादा प्रभावित है। पश्चिम सुमात्रा, उत्तरी सुमात्रा और आचेह प्रांत में भूस्खलन से पूरा-पूरा मोहल्ला मिट्टी में दब गया। बिजली गुल है, लोग अंधेरे में भोजन और पानी ढूंढ रहे हैं।

राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्तो ने देश को संबोधित करते हुए कहा, “सबसे बुरा दौर गुजर चुका है।” उप ऊर्जा मंत्री युलियट तंजुंग ने बताया कि बिजली बहाली का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन दूरदूरस्थ इलाकों में अभी कई दिन लगेंगे। मौसम विभाग ने जकार्ता के आसपास भारी बारिश, बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी दी है।

श्रीलंका: कीचड़ में दबे गांव, 335 की मौत

श्रीलंका में उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में भूस्खलन से 335 लोगों की जान गई। कई गांव पूरी तरह मिट्टी के नीचे दब गए। बारिश अभी भी जारी है, जिससे राहत कार्यों में भारी दिक्कत हो रही है। एक पीड़ित ने कहा, “हमारे पास कुछ भी नहीं बचा।”

थाईलैंड: सोंगख्ला प्रांत सबसे प्रभावित

थाईलैंड के दक्षिणी सोंगख्ला प्रांत में 131 लोगों समेत कुल 176 की मौत। हाट याई शहर का बाजार पानी में डूबा, दुकानें तबाह। अच्छी खबर यह है कि 80% इलाके में नल का पानी बहाल हो गया है और बुधवार तक पूरी तरह ठीक हो जाएगा।

सरकार ने 26,000 प्रभावित परिवारों को तुरंत 9,000 बात (लगभग 23,000 रुपये) की सहायता राशि बांटनी शुरू कर दी है।

मलेशिया: अभी कम प्रभावित, सिर्फ 3 मौतें

जलवायु परिवर्तन का कहर

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो गया है। इसी साल पाकिस्तान में भी ऐसी ही बाढ़ से 1,000 से ज्यादा लोग मरे थे।

हाल ही में खत्म हुए COP30 जलवायु सम्मेलन में जीवाश्म ईंधन (कोयला-पेट्रोल) को पूरी तरह बंद करने का कोई ठोस वादा नहीं हुआ, जिसकी दुनिया भर में आलोचना हो रही है।

अब भी हजारों लोग अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। राहत कार्य जारी हैं, लेकिन पूरा इलाका फिर से बसाने में महीनों लगेंगे।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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