मध्य-पूर्व संकट: होर्मुज़ मिशन पर सहयोग न मिलने से ट्रंप नाराज़, सहयोगियों को लगाई फटकार
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मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर कड़ा बयान देते हुए उन्हें खुलकर समर्थन न देने के लिए फटकार लगाई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दशकों से अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता रहा है, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी साझा करने की बात आती है, तो कई देश पीछे हटते नजर आते हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखना केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान पर बढ़ते दबाव के बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण बन गए हैं। खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आ रहे हैं। जहां अमेरिका बहुराष्ट्रीय सहयोग की मांग कर रहा है, वहीं कई देश सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहते हैं और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव को कम किया जा सकेगा या यह संघर्ष और व्यापक रूप ले लेगा।
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