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जेल में शुरू हुआ प्यार, अब शादी तक पहुंची कहानी

dailyhulchul

23 January, 2026 5 मिनट पढ़ें

राजस्थान के अलवर जिले से एक चौंकाने वाली और असामान्य प्रेम कहानी सामने आई है, जहां हत्या के मामलों में दोषी ठहराए गए दो कैदी अब शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। दोनों की मुलाकात जेल के भीतर हुई और धीरे-धीरे यह जान-पहचान प्रेम में बदल गई।

दोनों दोषी सांगानेर ओपन जेल में सजा काट रहे थे। करीब छह महीने पहले उनके बीच बातचीत शुरू हुई, जो आगे चलकर रिश्ते में बदल गई। अब अदालत की अनुमति के बाद उन्हें कुछ दिनों की आपात पैरोल दी गई है ताकि वे शादी कर सकें।

हाईकोर्ट से मिली सशर्त पैरोल

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों को सीमित अवधि के लिए सशर्त पैरोल दी है। इस दौरान उन्हें तय शर्तों का पालन करना होगा और समय पूरा होने पर वापस जेल लौटना अनिवार्य रहेगा। प्रशासन और पुलिस की निगरानी में ही शादी की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।

दोनों पर गंभीर आरोप

नेहा सेठ (उर्फ प्रिया सेठ) पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक युवक को डेटिंग ऐप के माध्यम से फंसाया, फिर उसका अपहरण कर फिरौती मांगी। बाद में पहचान उजागर होने के डर से युवक की हत्या कर दी गई और शव को सूटकेस में भरकर पहाड़ियों में फेंक दिया गया। इस मामले में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हनुमान प्रसाद पर आरोप है कि उसने अपनी प्रेमिका के कहने पर उसके पति और बच्चों समेत पांच लोगों की हत्या की। इस जघन्य अपराध में उसे भी उम्रकैद की सजा मिली थी।

समाज और कानून के बीच बहस

यह मामला केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि कानून, नैतिकता और समाज के नजरिए से भी चर्चा का विषय बन गया है। जहां कुछ लोग इसे सुधार और नए जीवन की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई लोग गंभीर अपराधों के दोषियों को पैरोल पर शादी की अनुमति देने पर सवाल उठा रहे हैं।

आगे क्या?

पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों को फिर से जेल लौटना होगा। उनकी शादी अब कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी की जाएगी, लेकिन उनका भविष्य अब भी अदालत के फैसलों और सजा की शर्तों से जुड़ा रहेगा।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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