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नोएडा में टेक्निकल इंजीनियर की दर्दनाक मौत: पिता बोले – “मेरा बेटा दो घंटे तक जिंदगी के लिए जूझता रहा”

dailyhulchul

19 January, 2026 5 मिनट पढ़ें

नोएडा के सेक्टर 150 में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई। युवराज देर रात घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे के कारण उनकी कार सड़क से फिसलकर एक गहरे पानी से भरे निर्माणाधीन गड्ढे में जा गिरी।

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, यह गड्ढा करीब 70 फीट गहरा था और आसपास कोई बैरिकेड या चेतावनी बोर्ड मौजूद नहीं था। कम दृश्यता के कारण युवराज को गड्ढे का अंदाजा नहीं हुआ और उनकी कार सीधे उसमें समा गई।

फोन पर पिता से लगाता रहा मदद की गुहार

युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद बेटे ने उन्हें फोन किया और रोते हुए कहा,
“पापा, मुझे बचा लो… मैं पानी में फंसा हूँ।”

पिता के अनुसार, युवराज लगभग दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा। वह कभी कार की छत पर चढ़कर खुद को बचाने की कोशिश करता, तो कभी मदद के लिए चिल्लाता रहा। उसने मोबाइल की टॉर्च जलाकर अपनी लोकेशन बताने की भी कोशिश की, लेकिन समय पर कोई प्रभावी मदद नहीं पहुंच पाई।

राजकुमार मेहता ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर मौजूद कई लोग मदद करने के बजाय वीडियो बनाते रहे, जिससे बचाव कार्य में और देरी हुई।

बचाव कार्य में भारी लापरवाही का आरोप

परिवार का कहना है कि पुलिस और दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई थी, लेकिन गहरे पानी में उतरने के लिए जरूरी उपकरण समय पर नहीं पहुंचे। गड्ढे से कार को निकालने में करीब पांच घंटे का समय लग गया, लेकिन तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी।

परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सड़क पर सही बैरिकेडिंग, लाइट और चेतावनी संकेत होते, तो यह हादसा टल सकता था।

बिल्डरों पर FIR, प्रशासन पर उठे सवाल

घटना के बाद पुलिस ने दो बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। कुछ सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और नोटिस की कार्रवाई भी की गई है।

इलाके में आक्रोश, सड़क सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई जगह खुले गड्ढे और अधूरे प्रोजेक्ट मौत को दावत दे रहे हैं।

युवराज मेहता की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का परिणाम मानी जा रही है, जिसने एक होनहार युवा की जान ले ली।

मुख्य बिंदु

  • युवा मतदाता पंजीकरण में 67% की वृद्धि दर्ज की गई है
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं
  • 18-25 आयु वर्ग के युवा अब राजनीतिक बहसों में सक्रिय भागीदारी ले रहे हैं
  • क्लाइमेट चेंज और डिजिटल राइट्स टॉप प्राथमिकताओं में शामिल हैं

"आज का युवा केवल मतदाता नहीं है, बल्कि वह नीति निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।"

— डॉ. राजेश कुमार, राजनीतिक विश्लेषक, JNU

सांख्यिकी और तथ्य

67%
युवा मतदाता पंजीकरण में वृद्धि
45%
युवा राजनीतिक चर्चाओं में भागीदारी
78%
सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट शेयर करते हैं
5.2M
नए युवा मतदाता रजिस्ट्रेशन

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